उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर रणनीतिक मंथन तेज हो गया है। राज्य की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर सपा के दो उम्मीदवारों की जीत का गणित मजबूत माना जा रहा है, लेकिन तीसरी सीट के लिए पार्टी को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
28 सितंबर को लखनऊ में बैठक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा के लिए 28 सितंबर को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में बैठक बुलाई है। बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नाम, चुनावी संख्या बल और तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने या नहीं उतारने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
फिलहाल तीसरी सीट को लेकर पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपलब्ध संख्या बल के अलावा अतिरिक्त समर्थन कहां से जुटाया जाए।
10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान
निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। मतदान 16 अक्टूबर को होगा और इसी दिन मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और 6 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे।
इन 10 सीटों में मौजूदा समय में आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास है। चुनाव के बाद विधानसभा में मौजूद दलों के संख्या बल के आधार पर सीटों का नया समीकरण सामने आएगा।
क्या है सपा का संख्या बल?
राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता मतों का गणित बन रहा है। उपलब्ध विधानसभा संख्या बल के आधार पर सपा दो सीटों के लिए जरूरी वोट जुटाने की स्थिति में है। अलग-अलग आकलनों में सपा के प्रभावी संख्या बल को लेकर कुछ अंतर है, लेकिन तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पर राजनीतिक रिपोर्टों में सहमति दिखाई देती है।
अमर उजाला के आकलन के मुताबिक, सपा के पास दो सीट जीतने के बाद करीब 21 वोट बच सकते हैं और तीसरी सीट के लिए उसे 16 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, नवभारत टाइम्स ने मौजूदा प्रभावी संख्या बल और कांग्रेस के संभावित समर्थन को जोड़कर अलग गणित बताया है। इसका मतलब है कि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों के नामांकन और विधायकों के वास्तविक समर्थन के बाद ही साफ होगी।

तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारेगी सपा?
यही इस चुनाव का सबसे अहम सवाल बन गया है। सपा के सामने विकल्प है कि वह दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर उपलब्ध वोटों को सुरक्षित रखे या तीसरे उम्मीदवार के जरिए मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बनाए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यदि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो पार्टी किसी अति पिछड़े या दलित वर्ग के चेहरे पर दांव लगाने पर विचार कर सकती है। हालांकि, उम्मीदवार के नाम और तीसरी सीट पर अंतिम फैसला अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
उम्मीदवारों के चयन पर भी नजर
28 सितंबर की प्रस्तावित बैठक में दो सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना है। तीसरे उम्मीदवार को लेकर फैसला संख्या बल, संभावित समर्थन और पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।
राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होने के कारण सपा के पास उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए सीमित समय है। 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख है और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
नामांकन के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल सपा के लिए दो सीटों का गणित अपेक्षाकृत स्पष्ट है, जबकि तीसरी सीट अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती पेश कर रही है। पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है या नहीं, और यदि उतारती है तो किस सामाजिक वर्ग से चेहरा सामने आता है—इन दोनों सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिल सकता है।
अंतिम तस्वीर नामांकन, उम्मीदवारों की घोषणा और विधायकों के समर्थन के बाद ही स्पष्ट होगी। 16 अक्टूबर का मतदान यह तय करेगा कि यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में दलों के बीच संख्या बल किस तरह तब्दील होता है।

