लंबे इंतजार के बाद वीरवार सुबह जैसे ही भाजपा ने 20 वार्डों के पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी की तो शहर की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई। यह सूची सिर्फ नामों की घोषणा नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक प्रयोग का संकेत भी है। इस बार पार्टी ने साफ तौर पर वफादारी से ज्यादा जीत की संभावना को प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि पुराने चेहरों के साथ नए और दल बदलकर आए नेताओं को भी मौका दिया गया है। जैसे ही सूची सामने आई वैसे ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि भाजपा इस बार पूरी रणनीति बदलकर मैदान में उतरी है।
पुराने और नए चेहरों का मिला-जुला दांव
इस बार भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के चयन में संतुलन बनाने की कोशिश की है। सूची में 11 ऐसे उम्मीदवार शामिल हैं जिन्होंने पिछला चुनाव लड़ा था। इनमें से 9 विजेता रहे थे जबकि 2 हार गए थे। पार्टी ने अपने सात पुराने विजेता चेहरों को फिर से टिकट देकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने जीत के फॉर्मूले को पूरी तरह छोड़ने के मूड में नहीं है। हालांकि दो जीतने वाले चेहरों को टिकट न देकर पार्टी ने नए समीकरण भी बनाए हैं। इस फैसले ने यह संकेत दिया है कि भाजपा सिर्फ पुराने प्रदर्शन पर निर्भर नहीं रहना चाहती बल्कि हर वार्ड के हिसाब से रणनीति बदल रही है।

दल-बदल और परिवारवाद की नई रणनीति
भाजपा की इस सूची में सबसे बड़ा संदेश यह है कि पार्टी ने दल बदलकर आए नेताओं पर भी बड़ा दांव खेला है। कांग्रेस और अन्य दलों से जुड़े कई नेताओं को टिकट देकर पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह मजबूत वोट बैंक को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। वहीं कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं जो परिवार के राजनीतिक नेटवर्क के जरिए मैदान में उतरे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अब स्थानीय पकड़ और पहचान को भी अहम मान रही है। हालांकि यह रणनीति जोखिम भरी भी साबित हो सकती है क्योंकि इससे पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ने की संभावना है।
नए चेहरों पर भरोसा और अंदरूनी चुनौती
करीब 9 नए चेहरों को मौका देकर भाजपा ने यह दिखा दिया है कि वह बदलाव के लिए तैयार है। लेकिन यही फैसला पार्टी के लिए चुनौती भी बन सकता है क्योंकि नए उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ अभी परखी जानी बाकी है। दूसरी ओर टिकट न मिलने से कई पुराने नेताओं में नाराजगी भी सामने आ रही है जिससे बगावत का खतरा बढ़ सकता है। गुटबाजी के संकेत भी टिकट वितरण में नजर आए हैं जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब जब भाजपा और कांग्रेस दोनों मैदान में हैं तो असली टक्कर हर वार्ड में अलग-अलग समीकरणों के आधार पर तय होगी और यही इस चुनाव को बेहद रोमांचक बना रहा है।

