‘बाहुबली’ के कट्टप्पा के नाम से मशहूर अभिनेता सत्यराज न केवल दक्षिण भारतीय फिल्मों में बल्कि हिंदी दर्शकों के बीच भी बहुत लोकप्रिय हैं। उन्होंने कई फिल्मों में अपनी दमदार भूमिका से सबका दिल जीता है, खासकर ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में दीपिका पादुकोण के पिता की भूमिका। लेकिन जहां उनकी प्रोफेशनल लाइफ सफल है, वहीं उनकी निजी जिंदगी पिछले चार सालों से बेहद कठिन दौर से गुजर रही है। उनकी पत्नी माहेश्वरी पिछले छह सालों से ‘साइलेंट ब्रेन हेमरेज’ के कारण कोमा में हैं, जिसकी जानकारी सत्यराज की बेटी दिव्या ने खुद सोशल मीडिया पर दी थी।
माहेश्वरी का कोमा में होना और परिवार की संघर्ष भरी कहानी
माहेश्वरी करीब आठ साल पहले अचानक सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने 50 की उम्र में प्रोड्यूसर बनने का फैसला किया था। यह उस वक्त था जब उनके पति और बच्चे अपने-अपने करियर में व्यस्त थे। लेकिन कुछ समय बाद उनकी जिंदगी में एक बड़ा बदलाव आया। दिव्या सत्यराज ने 2024 में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि उनकी मां कोमा में हैं और उनके पिता एक सिंगल पेरेंट की तरह परिवार की देखभाल कर रहे हैं। दिव्या ने लिखा कि वे टूट चुके हैं, लेकिन चमत्कार की उम्मीद अभी भी जिंदा है।

दिव्या सत्यराज ने पिता के साहस और समर्पण की कहानी बताई
दिव्या ने अपने पिता की तारीफ करते हुए एक भावुक पोस्ट शेयर की थी। उन्होंने लिखा कि उनकी मां पीईजी ट्यूब की मदद से घर पर रखी गई हैं और पिता चार सालों से एक मजबूत सिंगल पेरेंट की भूमिका निभा रहे हैं। दिव्या ने अपने और पिता के इस संघर्ष को ‘सिंगल मॉम क्लब’ से जोड़कर एक अलग ही भावना व्यक्त की। इस परिवार की कहानी प्यार, समर्पण और उम्मीद का संदेश देती है, जो हर कठिनाई का सामना करने के लिए प्रेरित करती है।
सत्यराज और माहेश्वरी की लव स्टोरी और साथ की मजबूती
सत्यराज और माहेश्वरी की शादी उस दौर में हुई थी, जब सत्यराज दक्षिण भारतीय फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं कर रहे थे। उनकी शादी को लेकर परिवार में कई तरह की मुश्किलें आईं, लेकिन माहेश्वरी की मां ने इस रिश्ते को पूरी तरह से स्वीकार किया। शादी के बाद ये जोड़ा चेन्नई के एक छोटे से घर में रहने लगा और आज सत्यराज दक्षिण सिनेमा के सबसे बड़े नामों में शुमार हैं। माहेश्वरी हमेशा कहती थीं कि सत्यराज न सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता हैं, बल्कि एक जिम्मेदार जीवनसाथी और पिता भी हैं, जो हर मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहे।

