सोशल मीडिया पर फैली अपुष्ट खबरों ने पंजाब की दो बड़ी निजी यूनिवर्सिटीज में कुछ ही घंटों के अंतर पर तनाव पैदा कर दिया। पहले चिटकारा यूनिवर्सिटी में छात्राओं के गायब होने की अफवाह फैली और अगले दिन LPU में रेप-सुसाइड के दावे ने प्रदर्शन का रूप ले लिया। दोनों मामलों में पुलिस अब वायरल दावों के स्रोत और घटनाक्रम की जांच कर रही है।
चिटकारा यूनिवर्सिटी में कैसे फैली अफवाह?
25 सितंबर की रात चिटकारा यूनिवर्सिटी के राजपुरा कैंपस में हॉस्टल से चीखें सुनाई देने और दो छात्राओं के गायब होने की बातें सोशल मीडिया पर फैलने लगीं। इसके साथ हॉस्टल में कथित “भूत” की मौजूदगी से जुड़े वीडियो भी शेयर किए गए।
पुलिस के मुताबिक, कुछ छात्रों द्वारा हॉरर साउंड चलाए जाने के बाद अफवाहों ने जोर पकड़ा। विश्वविद्यालय ने छात्राओं की मौत या आत्महत्या की खबरों को गलत बताया। पुलिस ने भी कहा कि जिन छात्राओं के लापता होने का दावा किया जा रहा था, उनके नाम या पहचान संबंधी जानकारी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के पास नहीं थी।
रातोंरात LPU में बदला माहौल
चिटकारा के बाद 26-27 सितंबर की रात LPU में सोशल मीडिया पर एक छात्रा के साथ कथित यौन हिंसा और आत्महत्या की खबर फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र गर्ल्स हॉस्टल के पास जमा हुए। विश्वविद्यालय ने इस दावे को निराधार बताया।
प्रदर्शन आगे बढ़ा तो कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आईं। छात्रों ने दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे यानी NH-44 को भी लंबे समय तक जाम रखा। पुलिस के मुताबिक बाद में स्थिति को नियंत्रित किया गया और यातायात बहाल कर दिया गया।
पुलिस की जांच में क्या सामने आया?
पंजाब पुलिस दोनों घटनाओं के बीच किसी संभावित कनेक्शन और बाहरी तत्वों की भूमिका समेत विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस ने दोनों घटनाओं को अभी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ घोषित नहीं किया है। चिटकारा मामले में फिलहाल FIR दर्ज नहीं होने की जानकारी सामने आई है, जबकि LPU मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की भी पड़ताल कर रही है। जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि अपुष्ट दावे पहली बार कहां से सामने आए और फिर किस तरह छात्रों के बीच तेजी से फैले।

LPU में कक्षाएं और परीक्षाएं स्थगित
हिंसक प्रदर्शन के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। मिड-टर्म परीक्षाएं अगले आदेश तक टाल दी गई हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों को अभिभावकों से सलाह लेकर अपने घर जाने की अनुमति भी दी है।
कैंपस में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक हालात अब नियंत्रण में हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
सोशल मीडिया अफवाहों ने खड़े किए सवाल
दोनों घटनाओं में एक समान पैटर्न नजर आया—पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग ग्रुप्स में अपुष्ट दावे तेजी से फैले और उसके बाद छात्रों में चिंता और आक्रोश बढ़ा। चिटकारा में कथित मौत और लापता छात्राओं की खबर गलत पाई गई, जबकि LPU में भी विश्वविद्यालय ने वायरल रेप-सुसाइड दावे को खारिज किया है।
इन घटनाओं ने एक बार फिर दिखाया कि कैंपस में किसी संवेदनशील खबर की आधिकारिक पुष्टि से पहले उसका वायरल होना कितनी तेजी से स्थिति बदल सकता है। फिलहाल पुलिस जांच पर निगाहें हैं और यह देखना अहम होगा कि इन अफवाहों की शुरुआत कहां से हुई और हिंसा तक मामला कैसे पहुंचा।
पंजाब की इन दो यूनिवर्सिटीज में हुए घटनाक्रम ने अफवाह, सोशल मीडिया और छात्र सुरक्षा से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल प्रशासन का फोकस शांति बनाए रखने और वायरल दावों की सच्चाई सामने लाने पर है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन घटनाओं के पीछे केवल अफवाह थी या इसके अलावा भी कोई संगठित भूमिका थी।

