पटना के चर्चित कोचिंग विवाद में एक बार फिर बड़ा मोड़ सामने आया है। ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक Raushan Anand के वकील निरंजन कुमार सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि बेऊर जेल में उनके मुवक्किल की हत्या की कोशिश की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित साजिश में खान सर के दो अंगरक्षकों की भूमिका हो सकती है, जो वर्तमान में फायरिंग मामले में जेल में बंद हैं।
जेल से बाहर आते ही किया बड़ा खुलासा
वकील निरंजन कुमार सिंह के अनुसार, रौशन आनंद के जेल से रिहा होने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि वह सीधे अपने भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार या परिवार से मिलने जाएंगे। लेकिन इसके बजाय वह सीधे पटना हाईकोर्ट पहुंचे और वहां उन्होंने कथित तौर पर अपनी जान को खतरा होने की बात कही।
वकील का दावा है कि 13 जून की रात जेल के भीतर रौशन आनंद पर हमला करने की कोशिश की गई थी। हालांकि इस संबंध में अभी तक जेल प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

प्रिंस यादव की मौत को बताया सुनियोजित साजिश
रौशन आनंद के वकील ने उनके भाई Prince Yadav की नेपाल में हुई मौत को भी संदिग्ध बताते हुए इसे हत्या का मामला करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रिंस यादव अपनी कानूनी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे और इसी कारण बिहार छोड़कर नेपाल गए थे।
वकील का आरोप है कि पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी और नेपाल में हुई घटना किसी सामान्य मौत का मामला नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है। हालांकि अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने भी हत्या की पुष्टि नहीं की है।
खान सर के खिलाफ FIR दर्ज कराने की तैयारी
निरंजन कुमार सिंह ने कहा कि यदि जांच में साजिश के संकेत मिलते हैं तो Khan Sir उर्फ फैसल खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उनका आरोप है कि नेपाल में हुई घटना के पीछे की योजना बिहार में तैयार की गई थी।
हालांकि ये सभी आरोप फिलहाल एक पक्ष द्वारा लगाए गए दावे हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस या संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
खान सर और रौशन आनंद के बीच चल रहा विवाद अब केवल कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रह गया है। फायरिंग, गिरफ्तारी, नेपाल में हुई संदिग्ध मौत और अब जेल में हत्या की कोशिश जैसे आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अदालत की कार्यवाही ही तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आखिर इस विवाद की वास्तविक तस्वीर क्या है।

