पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 50 लाख रुपये के कथित गबन मामले में आरोपी कर्मचारी की पत्नी को बड़ी राहत देते हुए उसकी अंतरिम अग्रिम जमानत को स्थायी कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता जांच में शामिल हो चुकी है और केवल कथित रकम की बरामदगी के लिए उसकी हिरासत आवश्यक नहीं मानी जा सकती। कोर्ट का यह आदेश आपराधिक मामलों में अग्रिम जमानत और जांच प्रक्रिया के संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी थाना में 13 मार्च 2026 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता नरेंद्र ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी में कार्यरत कर्मचारी शिव कुमार ने कई महीनों के दौरान कंपनी के करीब 50 लाख रुपये का कथित गबन किया। आरोप है कि इस राशि का कुछ हिस्सा विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जिनमें उनकी पत्नी मीनाक्षी का बैंक खाता भी शामिल था।
पत्नी की ओर से क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि वह एक गृहिणी हैं और उनका बैंक खाता उनके पति संचालित करते थे। खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर भी पति के नाम पर था। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि केवल मुख्य आरोपी की पत्नी होने के आधार पर उन पर आपराधिक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। साथ ही कहा गया कि यदि खाते में कोई विवादित राशि आई है, तो कानून के अनुसार उसकी जांच और वसूली की जा सकती है। यह भी बताया गया कि उनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

सरकार ने क्या रखा पक्ष?
हरियाणा सरकार ने अदालत में कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान याचिकाकर्ता के खाते में लगभग 6 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए। राज्य का तर्क था कि इतनी लंबी अवधि तक खाते में रकम आने के बावजूद यह मानना कठिन है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। सरकार ने यह भी दावा किया कि इस राशि का उपयोग मकान के ऋण और अन्य खर्चों के भुगतान में किया गया, इसलिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अंतरिम आदेश के बाद याचिकाकर्ता जांच में शामिल हो चुकी हैं और जांच में सहयोग कर रही हैं। अदालत ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उनकी हिरासत केवल कथित राशि की बरामदगी के उद्देश्य से मांगी जा रही है। ऐसे में अग्रिम जमानत समाप्त करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।
क्या है इस आदेश का महत्व?
अदालत के इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि मामले की जांच समाप्त हो गई है या आरोपों पर अंतिम निर्णय हो गया है। हाई कोर्ट ने केवल अग्रिम जमानत पर फैसला दिया है। मामले की जांच और मुकदमे की प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे जारी रहेगी और अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों के आधार पर संबंधित अदालत द्वारा तय किया जाएगा।

