देश में उच्च शिक्षा का विस्तार पिछले कुछ दशकों में तेजी से हुआ है। 1950 में जहां केवल लगभग 500 कॉलेज थे वहीं आज इनकी संख्या पचास हजार से अधिक हो चुकी है। विश्वविद्यालयों की संख्या भी सैकड़ों में पहुंच गई है। 18 से 23 वर्ष के युवाओं में कॉलेज जाने की दर भी बढ़ी है जो 2012 में लगभग 16 प्रतिशत थी और 2022 में बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई है। यह वृद्धि बताती है कि शिक्षा के अवसर पहले की तुलना में अधिक उपलब्ध हुए हैं। नए संस्थान छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंचे हैं जिससे छात्रों को पहले से अधिक विकल्प मिले हैं।
सामाजिक वर्गों के बीच असमानता बनी हुई
विस्तार के बावजूद सभी वर्गों के बीच समान अवसर नहीं बन पाए हैं। अनुसूचित जाति के छात्रों की सकल नामांकन दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 26 प्रतिशत हुई है। अनुसूचित जनजाति के छात्रों की दर 12 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हुई है। इसके बावजूद ये आंकड़े सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के मुकाबले अभी भी पीछे हैं। इसका अर्थ है कि शिक्षा तक पहुंच में सामाजिक और आर्थिक अंतर अभी भी बना हुआ है। कई समुदायों के छात्र उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के बावजूद बराबरी की स्थिति तक नहीं पहुंच पाए हैं।

आय के आधार पर कोर्स चयन में अंतर
आर्थिक स्थिति छात्रों के कोर्स चयन को प्रभावित करती है। उच्च आय वाले परिवारों के छात्र अधिकतर इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल कोर्स चुनते हैं। वहीं निम्न आय वर्ग के छात्र कला और वाणिज्य जैसे अपेक्षाकृत सस्ते विकल्पों की ओर जाते हैं। इंजीनियरिंग की डिग्री की लागत चार वर्षों में लगभग छह से आठ लाख रुपये तक पहुंच जाती है और निजी कॉलेजों में यह और भी अधिक हो जाती है। मेडिकल शिक्षा की लागत इससे भी अधिक होती है जिससे गरीब परिवारों के लिए इन क्षेत्रों में प्रवेश कठिन हो जाता है।
खर्च और संसाधनों की कमी सबसे बड़ी बाधा
कई सर्वे बताते हैं कि फीस हॉस्टल खर्च किताबों का खर्च और शहरों में रहने की लागत गरीब परिवारों के लिए बड़ी बाधा बनती है। इसी कारण कई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं या सस्ते कोर्स चुनने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा देश के विभिन्न क्षेत्रों में कॉलेजों का वितरण भी असमान है। दक्षिण और पश्चिम भारत में संस्थानों की संख्या अधिक है जबकि उत्तर और पूर्व के कई जिलों में कॉलेजों की कमी है। कुछ जिलों में दस से भी कम कॉलेज हैं जबकि अन्य में सैकड़ों मौजूद हैं। इसी तरह शिक्षक छात्र अनुपात और सुविधाएं भी हर जगह समान नहीं हैं जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।

