भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले छोटे लेन-देन के नुकसान के लिए 25,000 रुपये तक मुआवजा देने का नया ढांचा पेश किया। उन्होंने मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए अंतिम मौद्रिक नीति समिति की बैठक के निर्णयों की घोषणा करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए संभावित उपायों पर एक चर्चा पत्र भी जल्द जारी किया जाएगा। इसमें ‘डिले क्रेडिट’ और विशेष ग्राहकों जैसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। डिले क्रेडिट का मतलब है कि कुछ डिजिटल लेन-देन के पैसे प्राप्तकर्ता के बैंक खाते में जानबूझकर कुछ देर बाद जमा किए जाएं ताकि धोखाधड़ी की संभावना कम हो सके।
तीन महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों का मसौदा जल्द जारी होगा
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि ग्राहक हितों की रक्षा के लिए RBI तीन दिशानिर्देशों का मसौदा जारी करेगा। पहला दिशानिर्देश मिस-सेलिंग यानी गलत तरीके से वित्तीय उत्पादों की बिक्री से जुड़ा होगा। दूसरा ग्राहक की अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन में जिम्मेदारी सीमित करने से संबंधित होगा। तीसरा दिशानिर्देश कर्ज वसूली और रिकवरी एजेंटों की भूमिका से जुड़ा होगा। उन्होंने कहा, “छोटे-छोटे धोखाधड़ी वाले लेन-देन में हुए नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक मुआवजा देने का भी प्रस्ताव है।” उल्लेखनीय है कि 2017 में अनधिकृत लेन-देन में ग्राहक की सीमित जिम्मेदारी के नियम जारी किए गए थे, जिन्हें अब तकनीकी विकास के मद्देनजर संशोधित किया जा रहा है।

तकनीकी बदलावों के कारण मौजूदा नियमों का पुनरावलोकन
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के कारण पुराने निर्देशों की समीक्षा जरूरी हो गई थी। इस समीक्षा के बाद अब धोखाधड़ी वाले छोटे लेन-देन में मुआवजा देने के लिए नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। यह मसौदा जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा ताकि हितधारकों से सुझाव लिए जा सकें। इसके जरिए ग्राहक सुरक्षा और डिजिटल भुगतान की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जाएगा।
ग्राहकों को धोखा देने वाली मिस-सेलिंग पर सख्ती
मल्होत्रा ने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की गलत बिक्री को गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि बैंक काउंटरों पर तीसरे पक्ष के उत्पादों और सेवाओं की बिक्री ग्राहकों की जरूरतों और जोखिम सहिष्णुता के अनुरूप होनी चाहिए। गलत बिक्री से न केवल ग्राहक नुकसान में रहते हैं बल्कि वित्तीय संस्थान भी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता खोते हैं। इसलिए इस दिशा में RBI सख्त कदम उठा रहा है ताकि ग्राहकों को बेहतर और पारदर्शी सेवा मिले।

