पटना की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने बिहार की राजनीति को अचानक गर्मा दिया है। यह सीट भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है और यहां से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन विधायक थे। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद सीट खाली हो गई और अब यहां उपचुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। राजनीतिक दलों ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर को लेकर हो रही है जो भाजपा के गढ़ में चुनौती पेश करने की तैयारी में जुटे दिखाई दे रहे हैं। बांकीपुर सीट पर उनकी संभावित एंट्री ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। बीजेपी और जेडीयू दोनों इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर चल रहे हैं जबकि विपक्ष भी इसे बड़ा मौका मान रहा है। ऐसे में आने वाला उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं बल्कि बिहार की बदलती राजनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर के ऐलान पर जेडीयू का बड़ा बयान
गुरुवार को जेडीयू नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने के संकेतों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में हर पार्टी चुनाव लड़ती है और प्रशांत किशोर भी लड़ेंगे तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। अशोक चौधरी ने कहा कि विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं तो उपचुनाव भी लड़ेंगे और आगे लोकसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं। उनके बयान को राजनीतिक हलकों में काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि जेडीयू फिलहाल इस मुद्दे को ज्यादा गंभीरता से लेने से बचती दिखाई दे रही है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जन सुराज अगर बांकीपुर जैसी सीट पर मजबूत चुनौती पेश करता है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। अशोक चौधरी के बयान से यह साफ संकेत मिला कि एनडीए फिलहाल आत्मविश्वास में है और उसे अपने पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा है।

“जनता तय करेगी हार जीत” बयान से बढ़ी सियासी चर्चा
जब मीडिया ने अशोक चौधरी से पूछा कि प्रशांत किशोर का दावा है कि वे नितिन नवीन के गढ़ में बीजेपी को हराएंगे तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि हार और जीत का फैसला जनता करती है। उन्होंने कहा कि जनता यह तय करेगी कि भाजपा को हराना है या फिर प्रशांत किशोर की पार्टी को। अशोक चौधरी ने यह भी साफ किया कि अभी यह तय नहीं है कि प्रशांत किशोर खुद चुनाव लड़ेंगे या किसी और उम्मीदवार को मैदान में उतारेंगे। लेकिन उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो सकता है। बांकीपुर सीट शहरी वोटरों और राजनीतिक रूप से जागरूक मतदाताओं वाली सीट मानी जाती है जहां हर दल अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।
बकरीद और गांधी मैदान की चर्चा भी बनी राजनीतिक मुद्दा
इसी दौरान पटना के गांधी मैदान में बकरीद की नमाज को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। हर साल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गांधी मैदान पहुंचते थे लेकिन इस बार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी वहां नहीं पहुंचे। कोई मंत्री भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। इस पर अशोक चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री किसी जरूरी काम में व्यस्त होंगे और अल्पसंख्यक मामलों को देखने वाले मंत्री गांव गए हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाकी नेताओं के भी अपने कार्यक्रम रहे होंगे इसलिए वे गांधी मैदान नहीं पहुंच सके। हालांकि विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में चुनावी माहौल बनने के साथ ही हर छोटी बड़ी राजनीतिक गतिविधि चर्चा का विषय बन रही है। बांकीपुर उपचुनाव और उससे जुड़ी बयानबाजी ने बिहार की राजनीति को नई दिशा दे दी है।

