मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद में दिए गए फैसले के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। कोर्ट के इस निर्णय के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। यह मामला लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है और अब अदालत के फैसले ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। निर्णय के बाद जहां एक ओर समर्थक इसे ऐतिहासिक मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधी पक्ष इसे विवाद बढ़ाने वाला कदम बता रहा है।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई का तीखा बयान
महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Hussain Dalwai ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे मामलों के जरिए जानबूझकर मुस्लिम समुदाय को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसलों के पीछे राजनीतिक उद्देश्य छिपे होते हैं और इससे समाज में हिंदू-मुस्लिम तनाव बढ़ता है। उनके अनुसार पहले भी इस स्थान को लेकर यह तय किया जा चुका था कि स्थिति जस की तस बनी रहे, लेकिन अब नए विवाद खड़े किए जा रहे हैं।

धार्मिक स्थलों और इतिहास को लेकर उठे सवाल
Hussain Dalwai ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत में कई बौद्ध और जैन धार्मिक स्थलों को इतिहास में नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर धार्मिक मूर्तियों और संरचनाओं में बदलाव किए गए हैं। उनके अनुसार ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद बढ़ाना समाज के लिए ठीक नहीं है और इससे केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
भोजशाला मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
यह पूरा मामला मध्यप्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़ा हुआ है। शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस विवाद पर फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष की दो जनहित याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। अदालत ने इस स्थल को देवी सरस्वती के मंदिर के रूप में मान्यता दी है। इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया गया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार यहां नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। इस फैसले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है और मामले पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

