राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण के बीच टाटा समूह को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर टाटा समूह को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन पर पलटवार किया और कहा कि राहुल गांधी को हर मुद्दे में साजिश देखने की आदत छोड़ देनी चाहिए।
यह पूरा मामला राहुल गांधी की सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ। उन्होंने एक्स पर लिखा कि टाटा समूह को कथित तौर पर आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और देश के कारोबारी नेता इस मामले पर खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने उद्योग जगत के लोगों से सवाल किया कि वे कब तक चुप रहेंगे। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारतीय कारोबार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हाथों का खिलौना नहीं बनाया जाना चाहिए।
राहुल गांधी के इन आरोपों पर निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के कारोबारी और कानूनी मामलों को आपराधिक रंग देना सही नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी पर व्यापारिक नेताओं को राजनीतिक बहस में घसीटने और लोगों के बीच अविश्वास फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
वित्त मंत्री ने कांग्रेस के पुराने शासन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले लाइसेंस और कोटा व्यवस्था के चलते भारतीय कारोबारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए मौके तैयार करने पर काम कर रही है।
निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि देश के उद्योगों को मजबूत बनाना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि राजनीतिक फायदे के लिए आरोप लगाने के बजाय रचनात्मक तरीके से काम करना चाहिए। न्यायपालिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के तहत न्याय सुनिश्चित करना अदालतों की जिम्मेदारी है।
फिलहाल टाटा समूह को लेकर दोनों नेताओं के बीच आरोप और जवाब का दौर चर्चा में है। इस मामले में राहुल गांधी के आरोपों और सरकार के जवाब को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म बना हुआ है।

