पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा नजर नंदीग्राम पर है, जहां मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी खुद मैदान में उतरेंगी।
चुनाव आयोग ने दोनों सीटों पर 9 अक्टूबर को उपचुनाव कराने का ऐलान किया है।
बागी विधायक ने दिया ममता को बड़ा ऑफर
TMC के बागी नेता और विधायक अखरूर जमान के एक बयान ने अटकलों को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का उपचुनाव जीतने का रिकॉर्ड रहा है और उन्हें नंदीग्राम से चुनाव लड़ना चाहिए।
जमान ने यह भी कहा कि अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं तो उनका गुट उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगा। राजनीतिक तौर पर इस बयान को ममता के लिए एक संभावित राहत के रूप में देखा जा रहा है।
नंदीग्राम से जुड़ी है पुरानी राजनीतिक टक्कर
नंदीग्राम का नाम ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच राजनीतिक संघर्ष से गहराई से जुड़ा रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था।

अब सुवेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद उसी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने जा रहा है। ऐसे में अगर ममता यहां से उतरती हैं, तो मुकाबला सिर्फ एक चुनाव नहीं बल्कि पुरानी राजनीतिक कहानी के नए अध्याय जैसा होगा।
TMC ने अभी नहीं खोले पत्ते
TMC विधायक कुणाल घोष ने साफ किया है कि अभी उम्मीदवार को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, नंदीग्राम और रेजिनगर के प्रत्याशियों का फैसला पार्टी नेतृत्व और ममता बनर्जी करेंगी।
घोष ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ेंगी या किसी दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाएगा, यह अभी तय नहीं है।
रेजिनगर में भी दिलचस्प राजनीतिक गणित
रेजिनगर सीट भी इस उपचुनाव में महत्वपूर्ण है। जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने पहले ममता बनर्जी को समर्थन देने के लिए रेजिनगर सीट खाली करने की पेशकश की थी, अगर वह वहां से चुनाव लड़ना चाहें।
हालांकि, अब उनके बेटे को रेजिनगर से उम्मीदवार बनाए जाने की खबरों के बाद ममता के इस सीट से लड़ने की संभावना कमजोर मानी जा रही है। ऐसे में राजनीतिक निगाहें तेजी से नंदीग्राम की ओर मुड़ गई हैं।
क्या नंदीग्राम से वापसी करेंगी ममता?
ममता बनर्जी के लिए यह उपचुनाव राजनीतिक रूप से अहम हो सकता है। 2026 के विधानसभा चुनाव में वह भवानीपुर सीट से सुवेंदु अधिकारी से 15 हजार से ज्यादा वोटों से हार गई थीं। इससे पहले 2021 में नंदीग्राम में भी उन्हें सुवेंदु से शिकस्त मिली थी।
हालांकि, TMC ने अभी आधिकारिक तौर पर कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। बागी गुट की ओर से ममता के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने की बात ने जरूर समीकरण बदल दिए हैं।
अंतिम फैसला करेगा राजनीतिक तस्वीर साफ
फिलहाल नंदीग्राम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी पुराने सियासी मैदान में लौटने का फैसला करेंगी। अगर वह मैदान में उतरती हैं तो मुकाबले का राजनीतिक संदेश काफी बड़ा होगा। लेकिन अंतिम फैसला TMC नेतृत्व के हाथ में है। उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही यह साफ होगा कि नंदीग्राम में इस बार चुनाव सिर्फ सीट का है या ममता बनर्जी की राजनीतिक वापसी का भी।

