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Tuesday, July 21, 2026
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ओडिशा के तट पर 2 लाख कछुओं का रहस्यमयी जमावड़ा, क्या है इसका राज

ओडिशा के गंजाम जिले के रुशिकुल्या बीच पर इस साल फिर से प्रकृति का एक अनोखा और अद्भुत नजारा देखने को मिला है। हजारों की संख्या में ऑलिव रिडले समुद्री कछुए एक साथ तट पर पहुंचे और अंडे दिए। 14 मार्च से 17 मार्च के बीच करीब 2 लाख मादा कछुए समुद्र से निकलकर रेत पर आईं और अपने अंडों को सुरक्षित तरीके से जमीन में दबा दिया। यह घटना हर साल देखने को मिलती है लेकिन हर बार इसकी भव्यता लोगों को हैरान कर देती है। वैज्ञानिकों और वन विभाग की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि इस प्राकृतिक प्रक्रिया को समझा जा सके और सुरक्षित रखा जा सके।

कैसे होता है कछुओं का यह अनोखा सफर

ऑलिव रिडले कछुओं का जीवन चक्र बेहद दिलचस्प होता है। इनका प्रजनन समुद्र के अंदर नवंबर से जनवरी के बीच होता है। इसके बाद मादा कछुए अपने शरीर में अंडों को कुछ समय तक सुरक्षित रखती हैं। जैसे ही मौसम अनुकूल होता है यानी फरवरी और मार्च के बीच वह उसी तट पर लौटती हैं जहां उनका जन्म हुआ था। तट पर पहुंचने के बाद कछुए अपने फ्लिपर्स से रेत में गड्ढा बनाती हैं और उसमें अंडे देकर उसे फिर से ढक देती हैं। यह पूरी प्रक्रिया बेहद सटीक और प्राकृतिक संतुलन का उदाहरण है जो वर्षों से बिना किसी बदलाव के जारी है।

ओडिशा के तट पर 2 लाख कछुओं का रहस्यमयी जमावड़ा, क्या है इसका राज

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और निगरानी

इस साल भी वन विभाग ने कछुओं और उनके अंडों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। समुद्री और तटीय इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है ताकि किसी भी तरह का खतरा टाला जा सके। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिन स्थानों पर कछुओं ने अंडे दिए हैं वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। नावों के जरिए भी समुद्र में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही अंडों की गिनती और उनकी स्थिति का आकलन तय मानकों के अनुसार किया जा रहा है जिससे सही आंकड़े सामने आ सकें।

मई में जन्म लेंगे हजारों नन्हे कछुए

वन विभाग के मुताबिक, कछुओं के अंडों से बच्चे निकलने में करीब 45 से 60 दिन का समय लगता है। इस हिसाब से मई महीने में हजारों छोटे कछुए समुद्र की ओर अपना सफर शुरू करेंगे। यह दृश्य भी उतना ही खास होता है जितना अंडे देने का पल। रुशिकुल्या बीच को ऑलिव रिडले कछुओं का एक अहम नेस्टिंग साइट माना जाता है और यहां हर साल इतनी बड़ी संख्या में कछुओं का आना इस क्षेत्र की पर्यावरणीय अहमियत को दर्शाता है। प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अद्भुत नजारे को देख सकें।

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