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Tuesday, July 21, 2026
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मोहन सरकार में मंत्रियों की क्लास, मुख्यमंत्री ने पूछे चौंकाने वाले सवाल

मध्य प्रदेश की ढाई साल पुरानी मोहन यादव सरकार अब अपने मंत्रियों के कामकाज का गहराई से आकलन कर रही है। रविवार को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास समत्व भवन में सत्ता और संगठन के बड़े नेताओं की मौजूदगी में मंत्रियों की वन-टू-वन समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश. प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। हर मंत्री को अलग-अलग बुलाकर उनके कामकाज और संगठन से तालमेल पर सवाल पूछे गए। यह सिर्फ सामान्य समीक्षा नहीं थी बल्कि मंत्रियों के राजनीतिक व्यवहार. संगठन के साथ संबंध और जनता के बीच सक्रियता तक की जांच की गई। बैठक के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में सरकार और संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भाजपा अब अगले चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने मंत्रियों की सक्रियता और प्रदर्शन को नए पैमाने पर परख रही है।

मंत्रियों से पूछे गए कठिन सवाल

बैठक के दौरान मंत्रियों से बेहद विस्तार से सवाल पूछे गए। मुख्यमंत्री और संगठन के नेताओं ने यह जानना चाहा कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में कितनी बार गए। वहां कितनी कोर कमेटी बैठकों में शामिल हुए। कितनी बार पार्टी कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनीं और सांसदों व विधायकों के साथ समन्वय बनाकर काम किया। यहां तक पूछा गया कि उन्होंने अपने जिलों में कितनी बार रात्रि विश्राम किया और कार्यकर्ताओं के साथ भोजन किया। संगठन ने मंत्रियों से यह भी पूछा कि उन्होंने अपने विभाग में ऐसा कौन सा नवाचार किया जिससे व्यवस्था में सुधार आया हो और जनता को सीधा फायदा मिला हो। सूत्रों के अनुसार कई मंत्रियों से प्रशासनिक अड़चनों और अधिकारियों के रवैये को लेकर भी सवाल किए गए। भाजपा नेतृत्व यह जानना चाहता है कि कौन मंत्री सिर्फ फाइलों तक सीमित है और कौन जमीन पर सक्रिय होकर पार्टी को मजबूत कर रहा है।

मोहन सरकार में मंत्रियों की क्लास, मुख्यमंत्री ने पूछे चौंकाने वाले सवाल

कमजोर सीटों और संगठन पर खास फोकस

समीक्षा बैठक में उन विधानसभा सीटों पर भी चर्चा हुई जहां पिछले चुनावों में भाजपा कमजोर रही थी। मंत्रियों से पूछा गया कि उन्होंने इन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए। पार्टी नेतृत्व ने यह भी जानना चाहा कि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए क्या रणनीति बनाई गई। भाजपा अब 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अभी से कमजोर इलाकों पर फोकस कर रही है। यही वजह है कि मंत्रियों की राजनीतिक सक्रियता को गंभीरता से परखा जा रहा है। संगठन ने साफ संकेत दिया है कि सिर्फ मंत्री पद संभालना काफी नहीं बल्कि जनता और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ भी जरूरी है। कई मंत्रियों से यह भी पूछा गया कि उनके विभागों की योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित हुईं और जनता तक उनका लाभ पहुंचा या नहीं। इस समीक्षा को भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या मोहन कैबिनेट में होंगे बड़े बदलाव

इस समीक्षा बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में मोहन यादव मंत्रिमंडल में फेरबदल संभव है। भाजपा नेतृत्व अब उन मंत्रियों की पहचान करना चाहता है जिनका प्रदर्शन कमजोर रहा है या जिनकी संगठन में पकड़ कमज़ोर मानी जा रही है। पार्टी यह भी देख रही है कि कौन मंत्री जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने में सफल रहा और कौन विवादों या निष्क्रियता के कारण सवालों में घिरा रहा। सूत्रों का मानना है कि संगठन अब हर मंत्री की रिपोर्ट तैयार कर रहा है और उसी के आधार पर भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। भाजपा नेतृत्व की कोशिश है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाकर अगले चुनावों में मजबूत स्थिति बनाई जाए। फिलहाल समत्व भवन में हुई यह बैठक मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़े संकेत छोड़ गई है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि समीक्षा के बाद क्या कार्रवाई होती है।

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