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Tuesday, July 21, 2026
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बिहार में ट्रांसफर पोस्टिंग से पहले मंत्री दिलीप जायसवाल का बड़ा बयान

बिहार में हर साल जून महीने में होने वाली ट्रांसफर और पोस्टिंग प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। यह प्रक्रिया परंपरागत रूप से विभागीय प्रोटोकॉल के तहत होती है, लेकिन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में इसे लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं। कई बार इस पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप भी लग चुके हैं। इसी वजह से पूर्व में मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने भी इस विभाग की ट्रांसफर पोस्टिंग पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठाए थे। इस बार भी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

मंत्री दिलीप जायसवाल का ईमानदारी पर जोर

इस मुद्दे पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Dilip Jaiswal ने स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि सबसे पहले मंत्रालय को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब मंत्री स्वयं ईमानदार होगा तभी पूरा विभाग ईमानदारी से काम करेगा। उनके अनुसार ट्रांसफर पोस्टिंग और विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में ट्रांसफर पोस्टिंग से पहले मंत्री दिलीप जायसवाल का बड़ा बयान

लंबित मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान

Dilip Jaiswal ने बताया कि विभाग में हड़ताल के कारण जमीन मापी से जुड़े लगभग 48 हजार मामले लंबित हैं। इसके अलावा लाखों परिमार्जन आवेदन भी समय पर निपट नहीं पाए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन मामलों को तेजी से निपटाया जाए क्योंकि देरी से लोगों के बीच विवाद और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। सरकार ने 30 जून तक सभी लंबित मामलों को समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें लगभग 6 लाख 60 हजार जमाबंदी मामले भी शामिल हैं।

डिजिटलाइजेशन और भू-अभिलेख सुधार की बड़ी पहल

राज्य सरकार ने भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब तक करीब 33 करोड़ पन्नों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है, जिससे आम नागरिकों को जमीन से जुड़े दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। इस प्रक्रिया के तहत 15 लाख से अधिक लोगों को ऑनलाइन नकल भी प्रदान की जा चुकी है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी पाया है कि लगभग 8 हजार गांवों का कैडेस्ट्रल खतियान उपलब्ध नहीं है, जिसके लिए लोगों से सहयोग मांगा जा रहा है। साथ ही भू-लगान दरों में संभावित बदलाव पर भी विचार किया जा रहा है ताकि राजस्व व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

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