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Monday, April 20, 2026
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नेपाल की क्रांति का राज़ खोलने वाली Manisha Koirala, जिनके दादा थे देश के पहले प्रधानमंत्री

Manisha Koirala: पिछले मंगलवार नेपाल ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। देश में पहली बार जनरेशन ज़ी ने इतने आक्रामक अंदाज़ में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। देखते ही देखते आंदोलन इतना तेज़ हुआ कि प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफ़ा देना पड़ा। अब तक 15 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और इनमें एक 12 साल का बच्चा भी शामिल है। इस त्रासदी ने नेपाल की राजनीति और समाज दोनों को गहराई से झकझोर दिया है।

मनीषा कोइराला की खुली आवाज़

नेपाल की मूल निवासी और बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने इन प्रदर्शनों में खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। मनीषा सिर्फ़ फिल्म इंडस्ट्री तक ही सीमित नहीं रहीं बल्कि उन्होंने हमेशा अपने देश के मुद्दों पर खुलकर बात की है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मनीषा के दादा नेपाल के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने थे। इस पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि ने उन्हें देश की परिस्थितियों को और गहराई से समझने की ताकत दी है।

 

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तीन महीने पहले ही दी थी चेतावनी

करीब तीन महीने पहले एक बातचीत में मनीषा कोइराला ने साफ कहा था कि नेपाल का लोकतंत्र इसलिए असफल हो रहा है क्योंकि हर नया नेता अपने पूर्ववर्ती की नीतियों को पलट देता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा था कि नेपाल को स्थिरता और सम्मान की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी माना कि लोकतंत्र के साथ-साथ नेपाल को संतुलन बनाए रखने के लिए राजशाही की भी ज़रूरत है। उनके इन बयानों ने उस समय हलचल मचाई थी और आज की स्थिति ने उनके शब्दों को सही साबित कर दिया।

काला दिन और खून से सनी सड़कें

जब आंदोलन अपने चरम पर पहुँचा तो हिंसा भी सामने आई। सड़कों पर गोलियां चलीं और लोग घायल हुए। मनीषा कोइराला ने इस पर इंस्टाग्राम पर एक खून से सने जूते की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह नेपाल का काला दिन है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और न्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों पर गोलियां चलाना लोकतंत्र पर गहरा आघात है। इस पोस्ट ने उनके प्रशंसकों को भावुक कर दिया और सबने उन्हें सांत्वना दी।

नेपाल की नई दिशा की तलाश

नेपाल की राजनीति लंबे समय से अस्थिरता से जूझ रही है। हर कुछ वर्षों में सरकारें बदल जाती हैं और जनता को स्थायी समाधान नहीं मिल पाता। इस बार जनरेशन ज़ी ने जो विद्रोह किया है वह इस बात का संकेत है कि अब देश की नई पीढ़ी बदलाव चाहती है। मनीषा कोइराला जैसे लोग भी यही मानते हैं कि नेपाल को अब सिर्फ़ सरकार नहीं बल्कि मजबूत संस्थाओं की भी ज़रूरत है ताकि देश आगे बढ़ सके।

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