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Monday, April 20, 2026
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ईरान-इजराइल संघर्ष में खामेनेई की मौत, एसटी हसन ने अमेरिका को दुनिया का गुंडा बताया

ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। उनके साथ परिवार के कुछ सदस्यों के भी मारे जाने की खबर है। दोनों देशों की तरफ से लगातार हमले जारी हैं, जिससे पश्चिम एशिया की स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। खामेनेई की मौत पर भारत के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। इसी कड़ी में सपा के पूर्व सांसद डॉक्टर एसटी हसन ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए इसे दुनिया का ताकतवर गुंडा बताया।

अमेरिका और तेल की लड़ाई: एसटी हसन का विश्लेषण

एसटी हसन का कहना है कि अमेरिका खुद परमाणु हथियार बना चुका है, लेकिन किसी अन्य देश को परमाणु हथियार बनाने या मिसाइल विकसित करने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने इसे असंतुलन की स्थिति बताया और कहा कि इसी मनमानी के तहत अमेरिका ने ईरान पर हमला किया। हसन के अनुसार, यह हमला केवल तेल के लिए है। अमेरिका मध्य पूर्व के संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है और ईरान इसके लिए बड़ा लक्ष्य बन गया है। उन्होंने बताया कि यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक हितों से भी जुड़ा हुआ है।

ईरान-इजराइल संघर्ष में खामेनेई की मौत, एसटी हसन ने अमेरिका को दुनिया का गुंडा बताया

भारत की विदेश नीति पर सवाल

एसटी हसन ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा है कि भारत इस्राइल के साथ खड़ा है, जिससे फिलिस्तीन को अलग रखा गया है। हसन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्या भारत अब किसी और के हाथों की कठपुतली बन गया है। उनका मानना है कि भारत को अपनी इज़्ज़त और सम्मान बनाए रखना चाहिए और किसी के दबाव में अपनी नीति नहीं बदलनी चाहिए। उन्होंने 48 घंटे के भीतर हुए हमले को इस बात का संकेत बताया कि यह सब पहले से तैयार योजना थी।

दुनिया के सबसे बड़े डकैत की आलोचना

एसटी हसन ने अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा डकैत बताया। उन्होंने वेनेजुएला के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका वहां के संसाधनों पर कब्जा करने के लिए कितनी बड़ी ज्यादती कर चुका है और राष्ट्रपति को उठाकर ले गया। उनका मानना है कि ईरान में भी अमेरिका तेल के कुओं पर कब्जा करने की कोशिश करेगा। हसन ने इस बात पर जोर दिया कि यह केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि आर्थिक हितों की लड़ाई है, और दुनिया को इस संघर्ष में असंतुलन के खतरों से सावधान रहना चाहिए।

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