जबलपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर कुआंखेड़ा गांव में जन्माष्टमी का उत्सव हर साल रोमांच और परंपरा का अनोखा संगम बन जाता है। 30 फीट गहरे तालाब के ऊपर 50 फीट की ऊंचाई पर लटकी दही हांडी तक पहुंचना यहां युवाओं के लिए सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दम, संतुलन और साहस की परीक्षा है।
50 फीट ऊंचाई पर लटकी मटकी, नीचे 30 फीट गहरा तालाब
शुक्रवार को जन्माष्टमी के मौके पर कुआंखेड़ा गांव का नजारा बिल्कुल अलग था। रिमझिम बारिश के बीच करीब 120 फीट चौड़ा तालाब लोगों से घिरा हुआ था। दो विशाल बरगद के पेड़ों के बीच करीब 50 फीट की ऊंचाई पर रस्सी बांधी गई थी और इसी रस्सी पर दही हांडी लटकाई गई।
प्रतियोगियों की चुनौती आसान नहीं थी। उन्हें हाथों के बल रस्सी पर आगे बढ़ते हुए हांडी तक पहुंचना था। लेकिन जैसे ही कोई युवक रस्सी पर चढ़ता, दोनों किनारों पर खड़े ग्रामीण उसे तेजी से हिलाना शुरू कर देते। ऐसे में प्रतियोगी को ऊंचाई के साथ-साथ लगातार बदलते संतुलन का भी सामना करना पड़ता।
210 जांबाज पानी में गिरे, फिर गनपत ने फोड़ी हांडी
मुकाबले के दौरान एक के बाद एक प्रतियोगी संतुलन खोते गए और करीब 30 फीट गहरे पानी में जा गिरे। जानकारी के मुताबिक, इस बार करीब 210 युवाओं ने चुनौती में हिस्सा लिया।
तालाब में गिरते युवाओं की छपाक और किनारे खड़े लोगों का उत्साह पूरे माहौल को रोमांच से भर रहा था। मुकाबला देर शाम तक चलता रहा। इसी बीच सुंदरादेही गांव के गनपत सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया।
गनपत ने हिलती हुई रस्सी पर अपना संतुलन बनाए रखा और तमाम मुश्किलों को पार करते हुए 50 फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर दही हांडी फोड़ दी। मटकी टूटते ही पूरा गांव तालियों और जयकारों से गूंज उठा।

गनपत को मिला 5100 रुपये का इनाम
गनपत सिंह की जीत के बाद आयोजन समिति की ओर से उन्हें 5100 रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा ग्रामीणों ने भी अपनी ओर से स्वेच्छा से इनाम देकर विजेता का हौसला बढ़ाया।
आयोजकों के मुताबिक, इस आयोजन का उद्देश्य केवल जन्माष्टमी मनाना नहीं, बल्कि युवाओं को शारीरिक गतिविधियों से जोड़ना भी है।
15 साल पहले शुरू हुई थी अनोखी परंपरा
शक्तिमाई सेवा समिति के अध्यक्ष रामेश्वर पचौरी के मुताबिक, कुआंखेड़ा में इस परंपरा की शुरुआत करीब 15 साल पहले गांव के कुछ युवाओं ने की थी।
इसके पीछे उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना, मोबाइल की बढ़ती लत से बाहर निकालना और उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रेरित करना था। धीरे-धीरे यह आयोजन गांव की पहचान बन गया और अब आसपास के जिलों से भी लोग इसे देखने पहुंचते हैं।
सुरक्षा को लेकर आयोजकों का क्या कहना है?
इतनी ऊंचाई और गहरे पानी के कारण यह आयोजन जोखिम भरा नजर आता है। समिति के आयोजक अभिषेक बाथरे के मुताबिक, सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।
उनके अनुसार, प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए तैरना आना जरूरी है। नशे की हालत में किसी को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाती। इसके अलावा पानी में गिरने वाले प्रतिभागियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मौके पर स्थानीय गोताखोर और बचाव दल तैनात रहता है।
हजारों लोग देखने पहुंचते हैं रोमांचक मुकाबला
आयोजकों के मुताबिक, कुआंखेड़ा की यह जन्माष्टमी अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं रह गई है। जबलपुर के साथ-साथ नरसिंहपुर, सागर, सिवनी, दमोह और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।
कई बार प्रतियोगिता दो से तीन दिनों तक चलती है। बिना एंट्री फीस वाले इस आयोजन में ग्रामीणों की भागीदारी इसे और खास बनाती है।
कुआंखेड़ा की यह माखन मटकी जन्माष्टमी की धार्मिक आस्था के साथ युवाओं के साहस, शारीरिक क्षमता और सामुदायिक भागीदारी को भी जोड़ती है। यही वजह है कि हर साल यह अनोखा मुकाबला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

