प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ बताया है। यह करार न सिर्फ दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि दोनों पक्षों के आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों को भी मजबूत करेगा।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 साल चली बातचीत के बाद यह समझौता इस साल अंतिम रूप ले चुका है और इसके अगले साल से प्रभावी होने की उम्मीद है। समझौते के तहत 90% से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क को समाप्त या कम किया जाएगा, जिससे कपड़ा, फुटवियर और कई अन्य उत्पादों का व्यापार आसान होगा।
पीएम मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक के दौरान कहा कि यह समझौता विश्व की लगभग 25% GDP और एक-तिहाई वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। यह न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि डेमोक्रेसी और नियमों के प्रति साझेदारी को भी मजबूत करेगा।
भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी दुनिया में दूसरे स्थान पर है और इसे और बढ़ाकर 300 MMTPA तक ले जाने की योजना है। भारत पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष 5 निर्यातकों में शामिल है और इसकी पहुंच 150 से अधिक देशों तक फैली हुई है।
यह समझौता अमेरिकी टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार में बाधाओं को दूर करने और दोनों आर्थिक दिग्गजों के बीच सहयोग बढ़ाने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की संज्ञा दी है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच 2024-25 में 136.53 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर रहा।
इस ऐतिहासिक करार से भारतीय उद्योग और निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे और वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ और मजबूत होगी।

