गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनर हर घर की जरूरत बन जाता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि स्प्लिट AC लिया जाए या विंडो AC. कई लोग मानते हैं कि स्प्लिट AC महंगा होता है इसलिए वह ज्यादा बिजली खाता होगा. लेकिन वास्तविकता इससे अलग है. दोनों प्रकार के AC की कार्यप्रणाली अलग होती है. इसी कारण उनकी बिजली खपत भी अलग होती है. सही विकल्प चुनने के लिए केवल कीमत नहीं बल्कि उपयोग और तकनीक को समझना जरूरी होता है.
एक घंटे की बिजली खपत का अंतर
अगर 1.5 टन क्षमता वाले AC की बात करें तो विंडो AC एक घंटे में लगभग 1.5 से 1.8 यूनिट बिजली खर्च कर सकता है. वहीं इसी क्षमता का स्प्लिट AC लगभग 1.2 से 1.6 यूनिट के बीच बिजली खपत करता है. इसका मतलब यह है कि स्प्लिट AC सामान्य तौर पर कम बिजली इस्तेमाल करता है. खासकर जब यह इन्वर्टर तकनीक से लैस होता है. इस तकनीक के कारण कंप्रेसर लगातार एक ही गति से नहीं चलता बल्कि जरूरत के अनुसार काम करता है.

इन्वर्टर टेक्नोलॉजी का प्रभाव और अन्य कारण
आज के समय में अधिकतर स्प्लिट AC इन्वर्टर टेक्नोलॉजी के साथ आते हैं. यह तकनीक कंप्रेसर की स्पीड को कमरे के तापमान के अनुसार नियंत्रित करती है. इससे बार बार ऑन ऑफ होने की जरूरत नहीं पड़ती और बिजली की बचत होती है. वहीं विंडो AC आमतौर पर फिक्स्ड स्पीड पर काम करता है. इस कारण वह बार बार चालू और बंद होता है जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है. हालांकि बिजली की खपत केवल AC के प्रकार पर निर्भर नहीं करती. कमरे का आकार तापमान सेटिंग और इस्तेमाल का समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कौन सा AC चुनना सही रहेगा
अगर आप लंबे समय के लिए AC खरीदना चाहते हैं और बिजली बिल कम रखना चाहते हैं तो स्प्लिट AC बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि इसकी शुरुआती कीमत अधिक होती है लेकिन समय के साथ यह बिजली बचत के कारण फायदेमंद साबित होता है. दूसरी ओर अगर आपका बजट सीमित है और कम जगह के लिए AC चाहिए तो विंडो AC भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. छोटे कमरे में इसका प्रदर्शन संतोषजनक रहता है. कुल मिलाकर कहा जाए तो स्प्लिट AC खासकर इन्वर्टर मॉडल विंडो AC की तुलना में कम बिजली खर्च करता है और अधिक प्रभावी माना जाता है.

