जलवायु कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने विस्तृत दलीलें पेश कीं। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की अगली तारीख 25 जुलाई तय की।
याचिकाकर्ता ने निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति मांगी
सोनम वांगचुक की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि परिवार और वकीलों को अस्पताल में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि उनकी केवल सीमित मांग है कि वांगचुक को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति दी जाए। सिब्बल ने बताया कि मेदांता अस्पताल से बातचीत हो चुकी है और वहां इलाज कराने की व्यवस्था की जा सकती है। उनका तर्क था कि प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल से उपचार कराने का अधिकार है।

केंद्र सरकार ने सरकारी चिकित्सा व्यवस्था का किया बचाव
एएसजी चेतन शर्मा ने अदालत में कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल वांगचुक के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट के पहले के आदेश के अनुसार आवश्यक चिकित्सीय हस्तक्षेप किया जा रहा है। एएसजी ने कहा कि लंबे उपवास के कारण स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सफदरजंग अस्पताल और एम्स जैसी सरकारी संस्थाओं की चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा किया जाना चाहिए।
अदालत ने दोनों पक्षों से किए अहम सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार चिकित्सा जांच स्वतंत्र रूप से कराई गई है। न्यायालय ने यह भी पूछा कि उपचार मरीज की सहमति से किया गया या नहीं। सरकार की ओर से बताया गया कि आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रियाएं सहमति के बाद ही की गईं। वहीं, अदालत ने परिवार के सदस्यों को मिलने की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं को लेकर भी सरकार से जानकारी ली।
दोनों पक्षों के तर्कों पर सुनवाई जारी
सुनवाई के दौरान वांगचुक की पत्नी ने भी उपचार से जुड़े कुछ मुद्दे अदालत के समक्ष रखे। दूसरी ओर, सरकार ने कहा कि अदालत का उद्देश्य केवल उचित चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना है और मामले को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से रखे, जिसके बाद अदालत ने विस्तृत सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया।
सोनम वांगचुक के उपचार को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में मरीज की पसंद, चिकित्सा अधिकार और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है और मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी। अंतिम फैसला अदालत की आगामी सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

