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Tuesday, July 21, 2026
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चुनाव से पहले ही खेल खत्म क्या गुरुग्राम में चल रहा है बड़ा राजनीतिक खेल

साइबर सिटी गुरुग्राम में एक बार फिर सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर के चुनाव टल जाने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। 30 अप्रैल को सुबह 11 बजे निर्धारित इस चुनाव के लिए नगर निगम के 30 से अधिक पार्षद मौके पर पहुंच चुके थे और पूरी तैयारी भी की जा चुकी थी। लेकिन मेयर के उपस्थित न होने के कारण चुनाव प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम ने न केवल चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की क्षमता पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

राव इंद्रजीत सिंह की भविष्यवाणी साबित हुई सही

इस पूरे घटनाक्रम ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के बयान को भी चर्चा में ला दिया है। एक दिन पहले रेवाड़ी में आयोजित रैली के दौरान उन्होंने गुरुग्राम में होने वाले इस चुनाव को लेकर तंज कसा था और कहा था कि इतनी जल्दी चुनाव कराना उचित नहीं है। उनका मानना था कि नगर निगम द्वारा केवल 24 घंटे पहले नोटिफिकेशन जारी करना सही प्रक्रिया नहीं है क्योंकि इससे पार्षदों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल पाता। अब चुनाव के स्थगित होने के बाद उनका यह बयान सटीक साबित होता नजर आ रहा है और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

चुनाव से पहले ही खेल खत्म क्या गुरुग्राम में चल रहा है बड़ा राजनीतिक खेल

पार्षदों में भ्रम और प्रशासनिक स्थिति पर सवाल

चुनाव के लिए गुरुग्राम के सेक्टर 18 स्थित हिप संस्थान में बड़ी संख्या में पार्षद पहुंचे थे लेकिन उन्हें काफी समय तक यह जानकारी ही नहीं दी गई कि चुनाव स्थगित कर दिया गया है। दोपहर के समय नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया ने पार्षदों को आधिकारिक रूप से जानकारी दी कि चुनाव अब नहीं होगा। इस दौरान पार्षदों में असमंजस की स्थिति बनी रही और कई ने प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी भी जताई। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नगर निगम समय पर और पारदर्शी तरीके से फैसले लेने में सक्षम है या नहीं।

लगातार दूसरी बार स्थगन और भविष्य पर अनिश्चितता

यह पहला मौका नहीं है जब गुरुग्राम में सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर का चुनाव टला हो। इससे पहले भी एक बार इसी तरह चुनाव स्थगित किया जा चुका है और अब दूसरी बार भी वही स्थिति सामने आई है। बार बार चुनाव टलने से शहर की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और विकास कार्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीसरी बार चुनाव कब होगा और क्या गुरुग्राम को आखिरकार अपना सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर मिल पाएंगे। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रूप से गरमाने की संभावना है।

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