डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह समाज की सोच और व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। महाराष्ट्र सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय के प्रधान सचिव एवं महानिदेशक Brijesh Singh ने यह बात नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सभागार में आयोजित पुस्तक ‘डिमिस्टिफाइंग साइबर सिक्योरिटी’ के लोकार्पण समारोह में कही। उन्होंने कहा कि डेटा सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उनके अनुसार सुरक्षा केवल तकनीक या नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी असली शुरुआत लोगों की सोच और जागरूकता से होती है।
लेखन और ज्ञान साझा करना समाज की बड़ी सेवा
कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक Dr. Durga Prasad Dubey की सराहना करते हुए बृजेश सिंह ने कहा कि कई विशेषज्ञ अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य तो करते हैं, लेकिन अपने अनुभवों को लिखित रूप में समाज तक नहीं पहुंचा पाते। उन्होंने लोगों को ब्लॉग और लेखन के माध्यम से अपने विचार दर्ज करने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि आज का लेखन भविष्य का इतिहास बनता है। AI के दौर में जब मशीनें भारी मात्रा में कंटेंट तैयार कर रही हैं, तब इंसानों के लिए अपने अनुभव और विचार स्वयं लिखना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है।

भारत की डिजिटल ताकत और बढ़ती चुनौतियां
बृजेश सिंह ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल सार्वजनिक ढांचों में से एक का मालिक है। ऐसे में साइबर हमलों और डिजिटल खतरों से निपटना देश के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने विश्वास जताया कि साइबर सुरक्षा क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पुस्तक के लेखक डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे ने बताया कि उनकी पुस्तक साइबर सुरक्षा से जुड़े जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाने का प्रयास करती है ताकि आम लोग भी डिजिटल सुरक्षा के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकें।
मोबाइल फोन बना नई डिजिटल सीमा
कार्यक्रम में Ashishkumar Chauhan ने कहा कि आज हर व्यक्ति के हाथ में मौजूद मोबाइल फोन एक नई डिजिटल सीमा बन चुका है। उन्होंने इसे वर्तमान समय की सबसे बड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जून 2025 में भारत में इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 100 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जिससे देश एक विशाल डिजिटल इकोसिस्टम बन गया है। कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक Rajesh Pant सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया और AI युग में साइबर सुरक्षा, नेतृत्व, विश्वास और डिजिटल लचीलेपन पर विस्तृत चर्चा की।

