धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की वैकुण्ठ धाम में चल रही 21 दिवसीय कठोर साधना आज पूर्ण हो गई है। इस पूरे समय उन्होंने नारायण पर्वत की दुर्गम चट्टानों के बीच बनी एक छोटी गुफा में एकांत रहकर तपस्या की। पहले 11 दिन उन्होंने पूर्ण मौन और एकांत में साधना की, जबकि अगले 10 दिनों तक खाकचौक हनुमना मंदिर में हनुमान जी की विशेष आराधना करते रहे। इस कठिन साधना को उनके अनुयायी आध्यात्मिक ऊर्जा और तपस्या का अद्भुत उदाहरण मान रहे हैं।
नारायण पर्वत की परिक्रमा और गहन तपस्या
साधना के दौरान बाबा बागेश्वर ने नारायण पर्वत की परिक्रमा भी की और भगवान विष्णु की विशेष उपासना में लीन रहे। बताया जाता है कि उन्होंने कठिन पहाड़ी रास्तों पर कई घंटों तक पैदल यात्रा की। इस दौरान उनकी साधना इतनी गहन थी कि वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे रहे। साधना पूर्ण होने के बाद उनकी कई तस्वीरें सामने आईं, जिन्हें भक्तों ने दिव्य और प्रेरणादायक बताया है।

भक्तों और संत समाज की मौजूदगी
साधना के अंतिम चरण में देश और विदेश से आए श्रद्धालु खाकचौक हनुमान मंदिर में मौजूद रहे। जैसे ही साधना का समापन हुआ, वहां मौजूद भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला। अयोध्या हनुमान गढ़ी से आए राजूदास जी महाराज ने भी बाबा बागेश्वर से मुलाकात की और इस 21 दिवसीय तपस्या पर चर्चा की। संत समाज ने इस साधना को एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक उपलब्धि बताया।
15 हजार फीट ऊंचाई तक कठिन यात्रा का दावा
बाबा बागेश्वर ने बताया कि इस साधना के दौरान उन्होंने लगभग 13 घंटे तक पैदल यात्रा की और 15 हजार फीट की ऊंचाई तक स्थित बर्फीले क्षेत्रों में भी पहुंचे। इस कठिन यात्रा में उनके साथ बालक योगेश्वर दास जी महाराज भी मौजूद रहे। साधना के दौरान उन्होंने अनुयायियों को याद किया और एक भावुक पल में फिल्मी गीत भी गुनगुनाया, जिसने उनके भक्तों को और भी भावुक कर दिया।

