मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र में अब उपचुनाव की स्थिति बन गई है। यहां से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती को आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट के इस निर्णय को उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को तय की गई है, जिससे कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचती नजर आ रही है।
उपचुनाव की समयसीमा और कानूनी स्थिति ने बढ़ाई अनिश्चितता
कानूनी प्रावधानों के अनुसार विधानसभा की रिक्त सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है। दतिया सीट 2 अप्रैल से रिक्त मानी जा रही है, ऐसे में 2 अक्टूबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल राजेंद्र भारती को किसी प्रकार की त्वरित राहत मिलने की संभावना बेहद कम है, क्योंकि मामला दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। केवल हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने की स्थिति में ही उपचुनाव टल सकता है।

चुनाव आयोग सक्रिय, राजनीतिक हलचल तेज होने के संकेत
इस बीच विधानसभा सचिवालय ने निर्वाचन आयोग को उपचुनाव से संबंधित पत्र भेज दिया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। बंगाल, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में चल रहे चुनावी कार्यक्रमों के चलते दतिया उपचुनाव की घोषणा पहले लंबित थी, लेकिन अब जल्द ही चुनाव कार्यक्रम जारी होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर हलचल बढ़ गई है और सभी दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।
भाजपा की रणनीति और नरोत्तम मिश्रा की संभावित वापसी
राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा भाजपा की रणनीति को लेकर है। पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की संभावित दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है। दतिया सीट रिक्त घोषित होने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात कर लंबी चर्चा की, जिसे चुनावी तैयारी का संकेत माना जा रहा है। मिश्रा ने 2008 से 2023 तक लगातार तीन बार यह सीट जीती थी और पिछले चुनाव में वे मात्र 7,742 वोटों से हार गए थे। अब उनकी संभावित वापसी ने उपचुनाव को और अधिक रोचक बना दिया है।

