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Monday, April 20, 2026
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भारत और रूस के बीच 858 करोड़ रुपये की रक्षा डील से मजबूत होगी एयर डिफेंस क्षमता

भारत ने रूस के साथ 858 करोड़ रुपये की एक महत्वपूर्ण रक्षा डील पर हस्ताक्षर किए हैं जिससे देश की एयर डिफेंस क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह समझौता 27 मार्च 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन 2 में संपन्न हुआ। इस डील के तहत भारत को तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम प्राप्त होगा जो हवाई खतरों के खिलाफ रक्षा को और सशक्त बनाएगा। इसके अलावा P8I लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट के डिपो लेवल इंस्पेक्शन के लिए भी समझौता किया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह कॉन्ट्रैक्ट देश की मल्टीलेयर्ड एयर डिफेंस प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे भारत की सुरक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी।

तुंगुस्का सिस्टम से हवाई खतरों के खिलाफ बढ़ेगी सुरक्षा क्षमता

तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए रूस की कंपनी जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 445 करोड़ रुपये का अलग कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया है। यह सिस्टम ड्रोन क्रूज मिसाइल और अन्य हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है जिससे भारत की मौजूदा एयर डिफेंस संरचना और मजबूत होगी। भारत पहले से ही एस 400 बराक 8 और आकाश जैसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग कर रहा है और तुंगुस्का के शामिल होने से यह नेटवर्क और व्यापक हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की तकनीक से सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसी भी संभावित हवाई हमले का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जा सकेगा।

भारत और रूस के बीच 858 करोड़ रुपये की रक्षा डील से मजबूत होगी एयर डिफेंस क्षमता

P8I एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस के लिए स्वदेशी क्षमता को मिलेगा बढ़ावा

इंडियन नेवी के P8I लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट के लिए 413 करोड़ रुपये का एक और कॉन्ट्रैक्ट बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया गया है। यह समझौता 100 प्रतिशत इंडिजिनस कंटेंट के तहत बाय इंडियन कैटेगरी में किया गया है। इस डील के तहत देश में मौजूद MRO यानी मेंटेनेंस रिपेयर और ओवरहॉल सुविधाओं में P8I फ्लीट का डिपो लेवल मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को मजबूती देता है क्योंकि इससे भारत के भीतर ही तकनीकी रखरखाव और संचालन क्षमता विकसित होगी। इससे न केवल लागत में कमी आएगी बल्कि विदेशी निर्भरता भी घटेगी और नौसेना की ऑपरेशनल रेडिनेस बेहतर होगी।

एस 400 डिलीवरी से और मजबूत होगी भारत की मल्टीलेयर्ड सुरक्षा प्रणाली

भारत और रूस के बीच 2018 में हुई एस 400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील के तहत कुल पांच स्क्वाड्रन शामिल थे जिनमें से तीन पहले ही भारत को मिल चुके हैं। अब रूस ने आश्वासन दिया है कि शेष दो स्क्वाड्रन की डिलीवरी इसी वर्ष के अंत तक पूरी कर दी जाएगी। एस 400 सिस्टम भारत की सबसे उन्नत एयर डिफेंस क्षमताओं में से एक माना जाता है जो लंबी दूरी तक हवाई लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है। तुंगुस्का और अन्य मौजूदा सिस्टम के साथ मिलकर यह एक मजबूत मल्टीलेयर्ड डिफेंस नेटवर्क तैयार करेगा। इस पूरी श्रृंखला से भारत की रक्षा रणनीति और अधिक प्रभावी होगी और किसी भी प्रकार के हवाई खतरे से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी।

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