बिहार सरकार ने राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूल-कॉलेजों में राष्ट्रीय गीत Vande Mataram का गायन अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
AIMIM ने जताई कड़ी आपत्ति
AIMIM की बिहार इकाई ने इस आदेश का विरोध किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने किशनगंज में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इस तरह के फैसलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों का पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करेगी।

धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया
अख्तरुल ईमान ने कहा कि वंदे मातरम् का गायन कुछ धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है और उनकी आस्था इसकी अनुमति नहीं देती। उन्होंने कहा कि हर नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और किसी भी निर्णय को सभी समुदायों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी दी
AIMIM नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस आदेश के खिलाफ पहले ज्ञापन देगी और फिर जरूरत पड़ी तो सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की और इसे संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इसी दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि देश की आर्थिक स्थिति और नीतियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रतीकात्मक फैसलों के बजाय वास्तविक मुद्दों जैसे महंगाई और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।

