बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी आवास को लेकर बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शेखपुरा में दिए बयान में साफ कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि उनका घर बचा रहेगा लेकिन लोकतंत्र में सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में वे अलग अलग पदों पर रहे लेकिन कभी भी सरकारी आवास को निजी निवास के रूप में उपयोग नहीं किया। उनके इस बयान के बाद राज्य की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है और विपक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
प्रधानमंत्री और नीतीश कुमार का किया धन्यवाद
सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें बिहार की सेवा करने का अवसर मिला है जो उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक मई को अपना सरकारी आवास खाली कर दिया जो लोकतांत्रिक परंपरा का उदाहरण है। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी आवास जनता की सेवा का केंद्र होना चाहिए न कि किसी की निजी संपत्ति। उनके अनुसार इस सोच से प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ती है।

राबड़ी और तेजस्वी पर सीधा राजनीतिक हमला
अपने बयान में सम्राट चौधरी ने सीधे तौर पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को अपने और अपने परिवार के लिए अलग अलग सरकारी आवास की चाहत रहती है जबकि असल में यह जनता की सेवा का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं 1999 से अब तक कई सरकारी पदों पर रहे हैं लेकिन हमेशा सरकारी आवास को केवल कार्यालय की तरह उपयोग किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद जनता की सेवा है न कि किसी सुविधा को निजी लाभ के रूप में देखना।
पद छोड़ने को लेकर दिया बड़ा ऐलान
सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन के अंत में एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस दिन पार्टी और नेतृत्व यह तय कर देगा कि उनका काम पूरा हो चुका है उसी दिन वे बिना किसी देरी के 24 घंटे के भीतर सरकारी आवास छोड़ देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे कभी भी सरकारी आवास को निजी संपत्ति की तरह नहीं देखेंगे और हमेशा जनता के प्रति समर्पित रहेंगे। उनके इस बयान को बिहार की राजनीति में एक सख्त और स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल और बढ़ सकती है।

