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Tuesday, July 21, 2026
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UP स्कूलों में ‘अकबर महान’ अध्याय पर विवाद, शिवाजी सेना ने दी आंदोलन की चेतावनी

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की कक्षा 7 की इतिहास पुस्तक में शामिल ‘अकबर महान‘ अध्याय को लेकर नया विवाद सामने आया है। एक संगठन ने पाठ्यक्रम में संशोधन की मांग करते हुए राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कक्षा 7 की किताब को लेकर उठा विवाद

मुजफ्फरनगर में रविवार को शिवाजी सेना के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर कक्षा 7 की पुस्तक ‘भारत की महान विभूतियां’ में शामिल ‘अकबर महान’ अध्याय पर आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि पाठ्यक्रम में अकबर को “महान” बताया गया है, जबकि उनके अनुसार इतिहास को अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने पाठ्यक्रम में संशोधन की मांग उठाई है।

संगठन ने रखी अपनी दलील

शिवाजी सेना के जिला अध्यक्ष अर्चित आर्य ने कहा कि छात्रों को इतिहास तथ्यों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में अकबर के शासनकाल से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके संगठन के अनुसार अकबर को “महान” कहना उचित नहीं है। उन्होंने महाराणा प्रताप के संघर्ष का भी उल्लेख किया और सरकार से इतिहास के इस अध्याय की समीक्षा कराने की मांग की।

UP स्कूलों में 'अकबर महान' अध्याय पर विवाद, शिवाजी सेना ने दी आंदोलन की चेतावनी

आंदोलन की चेतावनी, सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि पाठ्यक्रम में जल्द संशोधन नहीं किया गया तो पहले मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा जाएगा और इसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक राज्य सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

इतिहास पर अलग-अलग मत, प्रक्रिया तय करती हैं विशेषज्ञ समितियां

अकबर के शासनकाल और उनकी ऐतिहासिक विरासत को लेकर इतिहासकारों के बीच लंबे समय से विभिन्न मत मौजूद हैं। स्कूलों के पाठ्यक्रम का निर्धारण आमतौर पर संबंधित शैक्षिक संस्थाओं, विशेषज्ञ समितियों और निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। ऐसे मामलों में पाठ्यक्रम में बदलाव का निर्णय भी संबंधित प्राधिकरणों द्वारा समीक्षा के बाद ही लिया जाता है।

कक्षा 7 के इतिहास पाठ्यक्रम को लेकर उठा यह विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल यह मांग एक संगठन की ओर से उठाई गई है और इस पर सरकार या शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है। आगे इस मुद्दे पर क्या निर्णय होता है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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