पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। सबसे ज्यादा चर्चा मौनपालन नीति को मंजूरी मिलने की हो रही है, जिसे राज्य की आर्थिकी और पर्यावरण दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। इसके अलावा शिक्षा, परिवहन, वन और खनन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में उत्तराखंड को एक मॉडल राज्य के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा।
शिक्षा और परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव
कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को मंजूरी दे दी है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वहीं परिवहन निगम को पहले 100 बसें खरीदने की अनुमति थी, लेकिन जीएसटी दरों में कमी के बाद अब 109 बसें खरीदी जाएंगी और साथ ही 200 नई बसों के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ अब 21 अशासकीय कॉलेजों तक बढ़ा दिया गया है, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे। इसके अलावा मदरसों को जिला स्तर पर मान्यता देने के लिए अध्यादेश लाने का भी फैसला लिया गया है।

मौनपालन नीति से बढ़ेगी आय और घटेगा मानव वन्यजीव संघर्ष
कैबिनेट के सबसे अहम फैसलों में से एक मौनपालन नीति है, जिसके तहत आबादी से सटे वन क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीणों की आय बढ़ेगी और साथ ही मानव और हाथी के बीच होने वाले संघर्ष में भी कमी आएगी। स्थानीय लोगों की भागीदारी से इस योजना को लागू किया जाएगा और जल्द ही इसके लिए विस्तृत गाइडलाइंस भी तैयार की जाएंगी। वर्तमान में राज्य में हर साल लगभग 3300 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन होता है और 10 हजार से अधिक लोग इस कार्य से जुड़े हैं।
उत्तराखंड को मॉडल राज्य बनाने की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड को शहद उत्पादन के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनाया जाएगा। राज्य के 71 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र का उपयोग करते हुए जंगलों में भी मौनबाक्स लगाए जाएंगे, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ेंगे। हाल ही में आयोजित वन विकास निगम के रजत जयंती समारोह में भी इस दिशा में निर्देश दिए गए थे। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब पूरे राज्य के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाएगी। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी बल्कि राज्य को एक नई पहचान भी दिला सकती है।

