सावन के दूसरे सोमवार को जबलपुर का रांझी इलाका शिवभक्ति के रंग में रंग गया। ‘बोल कांवड़िया, बोल बम’ के जयकारों और ढोल-नगाड़ों के बीच हजारों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद कांवड़ उठाकर भक्तों का उत्साह बढ़ाया।
जयकारों से गूंज उठा रांझी
10 अगस्त को संस्कारधानी जबलपुर में संस्कार कांवड़ यात्रा ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। जैसे ही ‘बोल कांवड़िया, बोल बम’ के जयकारे गूंजे, श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमने लगे।
सड़कों पर कांवड़ियों की लंबी कतारें नजर आईं। हर तरफ भगवा रंग, शिवभक्ति और उत्साह का माहौल दिखाई दिया। लगातार बजते ढोल और डमरू की आवाज ने यात्रा को और खास बना दिया।
CM मोहन यादव ने खुद उठाई कांवड़
संस्कार कांवड़ यात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए। उन्होंने कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने खुद कांवड़ उठाई और डमरू बजाते हुए यात्रा में हिस्सा लिया।

उन्होंने दादा गुरु के साथ पैदल चलकर कांवड़ियों का उत्साह बढ़ाया। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि भी उनके साथ मौजूद रहे।
‘नर्मदा का जल लेकर महादेव की ओर बढ़ रहे भक्त’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सावन का पवित्र सोमवार भगवान शिव की आराधना का विशेष अवसर है। कांवड़िये मां नर्मदा का जल लेकर भगवान भोलेनाथ को अर्पित करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जहां तक नजर जा रही है, वहां तक कांवड़िये ही दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, यह सिर्फ यात्रा नहीं बल्कि साधना, भक्ति और संकल्प का संगम है। उन्होंने नर्मदा को इस यात्रा की आध्यात्मिक शक्ति से भी जोड़ा।
धार्मिक पर्यटन और सनातन संस्कृति पर जोर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने कई कांवड़ यात्राएं देखी हैं, लेकिन इतनी बड़ी यात्रा पहली बार देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार देवस्थलों को सुविधायुक्त बनाने के साथ सनातन संस्कृति से जुड़े आयोजनों में आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दे रही है।
‘जीवन का मर्म सिर्फ खाना-पीना नहीं’
यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने संतों और दादा गुरु की साधना का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने पवित्र मार्ग पर चलकर आध्यात्मिक लक्ष्य हासिल करने की बात कही।
उन्होंने दादा गुरु के जीवन को साधना और त्याग का उदाहरण बताया और उनके आशीर्वाद की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा के कण-कण में शंकर का वास माना जाता है।
भक्ति, आस्था और सामाजिक संदेश
संस्कार कांवड़ यात्रा ने जबलपुर में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जुड़ाव की तस्वीर भी पेश की। हजारों श्रद्धालुओं का एक साथ चलना, जयकारे लगाना और शिवभक्ति में डूबना यात्रा की खास पहचान बना।
जबलपुर की इस कांवड़ यात्रा में सिर्फ कंधों पर कांवड़ नहीं थी, बल्कि श्रद्धालुओं के भीतर आस्था और संकल्प भी दिखाई दिया। सावन के इस पवित्र अवसर पर ‘बोल बम’ की गूंज ने एक बार फिर दिखाया कि धार्मिक यात्राएं लोगों को भक्ति, परंपरा और सामूहिक उत्साह के सूत्र में जोड़ने की ताकत रखती हैं।

