बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई इस मौत के बाद जहां परिजन और ग्रामीण न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस ने पूरे घटनाक्रम से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और फेसबुक लाइव ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
पिता और भाई भी FIR में नामजद
मामले में दर्ज पहली प्राथमिकी में भरत तिवारी पर अवैध हथियार रखने, पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने और फायरिंग करने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान उसके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी हथियार संबंधी जानकारी थी। इसी आधार पर दोनों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। इस कदम के बाद विवाद और गहरा गया है।
वायरल फेसबुक लाइव बना बहस का केंद्र
घटना से पहले और घटना के दिन भरत तिवारी द्वारा किए गए कई फेसबुक लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें वह पुलिस कार्रवाई और अपनी स्थिति को लेकर बातें करता दिखाई देता है। सबसे ज्यादा चर्चा उस अंतिम लाइव वीडियो की हो रही है, जिसमें वह पुलिस से घिरा नजर आता है। वीडियो के कुछ हिस्सों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे मामले पर बहस और तेज हो गई है।

पुलिस और परिजनों के दावों में अंतर
पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी ने गिरफ्तारी के दौरान फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की गई। वहीं परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि परिस्थितियां पुलिस के बयान से अलग थीं। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के कारण मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है।
विरोध प्रदर्शन और तीसरी FIR
मौत के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। शव गांव पहुंचने के बाद लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने इस मामले में भी एक अलग प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें कुछ लोगों को नामजद किया गया है और कई अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।
कैंडल मार्च से बढ़ा जनदबाव
घटना के विरोध में आरा शहर में कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की। इससे साफ है कि यह मामला अब केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक जनचर्चा का विषय बन गया है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब कई कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक सवालों के केंद्र में है। पुलिस अपनी कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रही है, जबकि परिजन और स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आने वाली जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

