खालिस्तान समर्थक और सांसद अमृतपाल सिंह को शनिवार दोपहर अमृतसर की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। वह फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। यह पेशी अमृतसर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश परिंदर सिंह की अदालत में हुई। सुरक्षा कारणों के चलते उनकी भौतिक उपस्थिति नहीं कराई गई और पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संपन्न हुई। अदालत में कार्यवाही निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ी, लेकिन इस दौरान एक अहम बात ने सभी का ध्यान खींचा कि पुलिस की ओर से कोई प्रतिनिधि अदालत में मौजूद नहीं था, जिससे कुछ देर के लिए चर्चा का माहौल बन गया।
पुलिस की गैरमौजूदगी पर अदालत में चर्चा
अदालत की कार्यवाही के दौरान पुलिस प्रतिनिधि की अनुपस्थिति को लेकर कानूनी हलकों में चर्चा होती रही। हालांकि, न्यायालय ने प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया और सुनवाई सामान्य रूप से जारी रखी गई। अमृतपाल के वकील ऋतुराज ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष और तथ्य आधारित सुनवाई की जाए। वकील ने कहा कि इस केस में कई तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें सही रूप में सामने लाना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

अजनाला थाने मामले से जुड़ा है विवाद
यह मामला अजनाला थाने में हुए विवाद से जुड़ा हुआ है, जहां अमृतपाल सिंह और उनके समर्थकों पर हमला करने और थाने में जबरन घुसने का आरोप है। उस समय बड़ी संख्या में समर्थक थाने के बाहर जुटे थे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम एक गिरफ्तार साथी को छुड़ाने के प्रयास में हुआ था। इस दौरान बैरिकेड्स तोड़े गए और पुलिस से झड़प भी हुई थी। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को निर्धारित की है, जिसमें आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
41 आरोपियों पर दर्ज है गंभीर मामला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस पूरे मामले में कुल 41 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। अमृतपाल सिंह को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया गया है। उन्हें अप्रैल 2023 में मोगा के रोड़े गांव से गिरफ्तार किया गया था और तब से वह डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मामला और भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है, क्योंकि इसमें कानून व्यवस्था और राजनीतिक दोनों पहलू जुड़े हुए हैं।

