पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर में बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को ‘चिट्टा मुक्त’ करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव बीजेपी नशा मुक्त पंजाब के मुद्दे पर लड़ेगी।
नशा पीड़ित परिवारों से मिले अमित शाह
जालंधर में रैली से पहले अमित शाह ने नशे से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद रैली में उन्होंने पंजाब के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य देश की खाद्य सुरक्षा और सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
शाह ने कहा कि पंजाब की पहचान नशे से नहीं होनी चाहिए और नशे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है।
31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन
अमित शाह ने कहा कि अगर पंजाब में बीजेपी की सरकार बनती है तो 31 दिसंबर 2029 तक राज्य को चिट्टा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि उस तारीख के बाद पंजाब में चिट्टा बेचने वाला कोई नहीं बचेगा।
शाह ने अपने भाषण में नशे के कारोबार को खत्म करने की तुलना केंद्र सरकार की आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई से भी की। ये उनके राजनीतिक भाषण में किए गए दावे और वादे हैं।

2027 चुनाव में नशा बनेगा बीजेपी का प्रमुख मुद्दा
शाह ने स्पष्ट किया कि पंजाब में कई दूसरे मुद्दे मौजूद हैं, जिनमें खेती, उद्योग, रोजगार, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बीजेपी 2027 का विधानसभा चुनाव नशा मुक्त पंजाब के मुद्दे को प्रमुखता देते हुए लड़ेगी।
बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ 18 सितंबर को शुरू हुई थी और राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी। जालंधर में इसका समापन हुआ।
भगवंत मान सरकार पर लगाए आरोप
अमित शाह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर नशे के कारोबार को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सरकार के चुनावी वादों को लेकर भी सवाल किए और रोजगार तथा किसानों से जुड़े वादों का जिक्र किया। ये आरोप शाह द्वारा लगाए गए हैं; इन पर AAP ने अलग प्रतिक्रिया दी है।
AAP ने पलटवार करते हुए शाह के पंजाब दौरे और नशे के मुद्दे पर सवाल उठाए। पार्टी ने एक ड्रग्स जब्ती का हवाला देते हुए केंद्र से देशभर में नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा।
नशे के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर भी 2029 का लक्ष्य
अमित शाह का 2029 वाला लक्ष्य सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है। सितंबर 2026 में केंद्र सरकार ने ‘Vision Document 2026-2029’ के तहत देश में ड्रग्स के कारोबार को खत्म करने के लिए समयबद्ध रोडमैप की बात कही थी। गृह मंत्रालय के मुताबिक इसमें लक्ष्य, समयसीमा, निगरानी और जवाबदेही के साथ कई विभागों के लिए कार्ययोजना तय की गई है।
23 सितंबर को राष्ट्रीय एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स सम्मेलन में भी शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक देश से ड्रग्स के कारोबार को उखाड़ने का लक्ष्य बताया था।
पंजाब चुनाव में नशे का मुद्दा कितना अहम होगा?
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने नशे के मुद्दे को अपने पंजाब अभियान के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने रखा है। वहीं, सत्तारूढ़ AAP और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी इस मुद्दे को चुनावी बहस का हिस्सा बना रही हैं।
फिलहाल अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 की स्पष्ट समयसीमा के साथ पंजाब को ‘चिट्टा मुक्त’ करने का वादा किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रस्तावित नीतियां, कार्रवाई और उनके परिणाम आने वाले समय में इस राजनीतिक वादे के क्रियान्वयन का आधार होंगे।

