वाराणसी में समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के 53वें जन्मदिन पर जारी एक पोस्टर विवाद का कारण बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में दावा किया जा रहा है कि पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान विष्णु के कृष्ण स्वरूप में दर्शाया गया और उनकी पूजा-अर्चना की गई। इस घटना के बाद धार्मिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
संतों ने जताई नाराजगी
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की तुलना भगवान से करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक प्रचार या व्यक्तिपूजा के लिए उपयोग सनातन परंपरा के अनुरूप नहीं है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग
फलाहारी महाराज ने सरकार और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं से धार्मिक प्रतीकों के उपयोग में संयम बरतने की अपील की।
ब्रज क्षेत्र में भी सामने आई प्रतिक्रियाएं
इस मामले पर ब्रज क्षेत्र के कई संतों और धर्माचार्यों ने भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था का सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना चाहिए, जिससे समाज में विवाद या धार्मिक भावनाएं प्रभावित हों। वहीं, इस खबर के प्रकाशित होने तक समाजवादी पार्टी की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

