शिरोमणि अकाली दल ने देश में महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। चंडीगढ़ में हुई पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में महिला राजनीतिक भागीदारी के साथ परिसीमन के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में बराबर प्रतिनिधित्व देने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
महिलाओं को मिले बराबर राजनीतिक हिस्सेदारी
अकाली दल ने कहा कि उसकी विचारधारा सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरित है, जिन्होंने महिलाओं की गरिमा, समानता और अधिकारों पर जोर दिया। पार्टी का मानना है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
पार्टी नेताओं ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की जरूरत बताई और कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
SGPC का दिया उदाहरण
बैठक में अकाली दल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का उदाहरण भी दिया। पार्टी के मुताबिक, SGPC अपने सदन में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान कर चुकी है।

अकाली दल का तर्क है कि जब धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो देश की राजनीतिक व्यवस्था में भी इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
परिसीमन को लेकर भी रखी मांग
महिला आरक्षण के साथ बैठक में परिसीमन को लेकर भी पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट किया। अकाली दल ने निष्पक्ष और संतुलित परिसीमन की मांग करते हुए कहा कि इसकी प्रक्रिया में किसी राज्य को अनुचित लाभ या नुकसान नहीं होना चाहिए।
पार्टी का कहना है कि देश के सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर ऐसा परिसीमन किया जाना चाहिए, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संतुलन बना रहे।
लोकसभा सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन
अकाली दल ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात कही गई है।
पार्टी के अनुसार, सीटों की संख्या बढ़ाने से राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर पैदा होने वाली चिंताओं को कम किया जा सकता है और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर व्यापक सहमति बनाने में मदद मिल सकती है।
अब जल्द फैसले की मांग
अकाली दल ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों ही महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दे हैं। पार्टी चाहती है कि महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाए और परिसीमन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी हो।
अकाली दल की मांग ने ऐसे समय में राजनीतिक बहस को तेज किया है, जब संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर चर्चा लगातार अहम होती जा रही है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इन मांगों पर आगे क्या कदम उठाती है।

