जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन के मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया।
अभिजीत दिपके ने क्या कहा?
सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद अभिजीत दिपके की पहली प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर सामने आई। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी गलती क्या है—जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना? इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आधिकारिक तौर पर इमरजेंसी घोषित करने की हिम्मत दिखाने की बात कही।
अभिजीत दिपके इन दिनों महाराष्ट्र में हैं। दादी के निधन के कारण उन्हें अपने गांव जाना पड़ा है।
इंडिया ब्लॉक को लेकर भी दिया बयान
मीडिया से बातचीत में जब उनसे इंडिया ब्लॉक के साथ संबंधों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि दोनों का मकसद एक है। उनके मुताबिक, CJP और इंडिया ब्लॉक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने-अपने तरीके से आवाज उठा रहे हैं।
दिपके ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप है और आगे भी स्वतंत्र ही रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्र रहने का मतलब इंडिया ब्लॉक के खिलाफ होना नहीं है।
जंतर-मंतर पर पुलिस ने पकड़ा था
13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे अपने कुछ समर्थकों के साथ जंतर-मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच गए थे। वहां उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाया जा चुका है। इसके बाद तीनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

सौरव और आशुतोष पांच दिन की न्यायिक हिरासत में
मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, CJP के तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे से 5 हजार रुपये का बॉन्ड भरवाया गया और एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त लगाई गई।
इससे पहले 10 अक्टूबर के CJP प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कुछ नेताओं को भी शांति बनाए रखने के बॉन्ड के बाद रिहा किया गया था।
जंतर-मंतर पर अब क्यों नहीं हो सकता प्रदर्शन?
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन स्थलों को लेकर प्रशासन ने हाल में बदलाव किया है। जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के बाद रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है।
CJP ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को राजधानी के राजनीतिक केंद्र से दूर करने से उनकी आवाज कमजोर होगी।
SIR और CEC के खिलाफ जारी है आंदोलन
CJP और विपक्षी दलों का आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर जारी है।
सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत के बाद अब यह विवाद और बढ़ सकता है। एक तरफ पुलिस कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रदर्शन स्थलों का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ CJP इसे विरोध के अधिकार पर कार्रवाई बता रहा है।

