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Thursday, October 15, 2026
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राहुल गांधी पर पीयूष गोयल का पलटवार, बोले- टीएन शेषन को कांग्रेस ने दिया था चुनाव लड़ने का टिकट

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के पुराने फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने टीएन शेषन, एमएस गिल और अन्य अधिकारियों के उदाहरण देकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कांग्रेस के सवालों को चुनौती दी।

राहुल गांधी पर पीयूष गोयल का हमला

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के विरोध के बीच बीजेपी ने राहुल गांधी पर पलटवार किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने राजनीतिक इतिहास और फैसलों पर ध्यान नहीं देती।

गोयल के मुताबिक, कांग्रेस ने अतीत में चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों को अलग-अलग राजनीतिक और सरकारी पद दिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इन उदाहरणों को भी ध्यान में रखना चाहिए। ये आरोप बीजेपी की ओर से लगाए गए हैं और इन पर कांग्रेस का जवाब उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

टीएन शेषन को चुनाव लड़ने का टिकट देने का मुद्दा

पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस उनकी ईमानदारी की प्रशंसा करती थी, लेकिन 1999 में उन्हें बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस का टिकट दिया गया।

गोयल ने सवाल उठाया कि क्या इसे शेषन को राजनीतिक रूप से पुरस्कृत करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चर्चा करते समय कांग्रेस के पुराने राजनीतिक फैसलों को भी परखा जाना चाहिए।

एमएस गिल और कांग्रेस में उनकी भूमिका का जिक्र

बीजेपी नेता ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और बाद में कांग्रेस से जुड़े। गोयल ने उनके पद्म विभूषण से सम्मानित होने, राज्यसभा पहुंचने और केंद्रीय मंत्री बनाए जाने का हवाला दिया।

गोयल ने इन घटनाओं को चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों और राजनीति के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया। हालांकि, किसी अधिकारी को बाद में सरकारी या राजनीतिक पद मिलना अपने आप में किसी अनुचित लेनदेन का प्रमाण नहीं है। ऐसे आरोपों का आकलन करने के लिए संबंधित फैसलों और परिस्थितियों के ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।

टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर का भी जिक्र

पीयूष गोयल ने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि मीणा को बाद में कांग्रेस की राजस्थान घोषणापत्र टीम में शामिल किया गया, जबकि केलकर को चुनाव के बाद केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का मुख्य सचिव घोषित किया गया।

गोयल ने इन घटनाओं के आधार पर राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों के बीच संभावित संबंधों पर सवाल उठाए। उनके बयानों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इन मामलों पर संबंधित अधिकारियों और कांग्रेस का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन की रणनीति

यह बयान ऐसे समय आया है, जब इंडिया गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। खबर के मुताबिक, राहुल गांधी ने गठबंधन के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए बुलाया था, जहां आगे की रणनीति पर विचार होना था।

इससे पहले सोमवार को इंडिया गठबंधन ने दिल्ली के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका दाखिल की। इस याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना जताई गई है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सियासी बहस तेज

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। कांग्रेस जहां मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के पुराने फैसलों को बहस के केंद्र में ला दिया है।

इस विवाद में राजनीतिक आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता का आकलन किसी एक बयान या पुराने उदाहरण के बजाय संबंधित फैसलों, नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

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