उत्तर प्रदेश में बाढ़ के खतरे को कम करने और आबादी के साथ कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक अब तक 1,549 बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं पूरी होने की जानकारी दी गई है। इनके जरिए 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सुरक्षित करने और 2.21 करोड़ से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचाने का दावा किया गया है। वहीं, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से किसानों को भी लाभ मिलने की बात कही गई है।
बाढ़ से बचाव के लिए 1,549 परियोजनाएं पूरी
उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जोखिम कम करने के लिए बाढ़ सुरक्षा के कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक अब तक करीब 1,549 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य बाढ़ के प्रभाव को कम करना, ग्रामीण आबादी की सुरक्षा करना और कृषि भूमि को नुकसान से बचाना है। बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में फसलों, घरों और ग्रामीण संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में सुरक्षा संबंधी कार्य प्रभावित इलाकों में जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सुरक्षा
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अनुसार, बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं के माध्यम से 25.59 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सुरक्षित किया गया है। इसमें कृषि भूमि की सुरक्षा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाढ़ से खड़ी फसलें बर्बाद होने और उपजाऊ मिट्टी को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
खेती पर निर्भर परिवारों के लिए खेतों की सुरक्षा सीधे उनकी आजीविका से जुड़ी होती है। बाढ़ का प्रभाव कम होने से प्रभावित क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन परियोजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन अलग-अलग क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिम और सुरक्षा कार्यों के वास्तविक परिणामों के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
2.21 करोड़ से अधिक लोगों को मिला लाभ
सरकार के मुताबिक, बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं से प्रदेश में 2.21 करोड़ से अधिक आबादी को लाभ मिला है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहता।

इससे सड़क संपर्क, स्थानीय कारोबार, शिक्षा और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। बाढ़ नियंत्रण के उपायों से इन प्रभावों को कम करने और ग्रामीण जीवन को सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
1,300 सिंचाई परियोजनाएं भी पूरी
बाढ़ सुरक्षा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक कुल 1,300 सिंचाई परियोजनाएं पूरी की गईं।
इन परियोजनाओं से 24.11 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन हुआ और 1.90 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने और कृषि कार्यों को सहयोग देने का प्रयास किया गया है।
75 जिलों में सिंचाई का व्यापक नेटवर्क
प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नहरों, जलाशयों और नलकूपों का नेटवर्क भी महत्वपूर्ण है। दी गई जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 76,527 किलोमीटर लंबी नहरें, 71 जलाशय और 36,342 नलकूप सिंचाई व्यवस्था का हिस्सा हैं।
यह नेटवर्क कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ सिंचाई सुविधाओं की नियमित उपलब्धता, रखरखाव और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप पानी के वितरण पर भी निर्भर करता है।
बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई से कृषि को मजबूती की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई परियोजनाओं के आंकड़े राज्य में जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों के विस्तार को दर्शाते हैं। इन प्रयासों का प्रमुख उद्देश्य आबादी और कृषि भूमि को बाढ़ के नुकसान से बचाना तथा खेती के लिए सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
आगे इन परियोजनाओं की सफलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि वे बाढ़ के दौरान कितना नुकसान कम करती हैं, किसानों को पानी कितनी नियमितता से मिलता है और प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आजीविका को कितनी सुरक्षा मिलती है।

