पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत में गठबंधन को लेकर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद गठबंधन की राह में बड़ी अड़चन बने हुए हैं।
रामदास अठावले ने गठबंधन की पैरवी की
इसी बीच NDA के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने BJP और अकाली दल को साथ आने की सलाह दी है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि पंजाब में NDA की सरकार बनाने के लिए दोनों दलों का साथ आना जरूरी है।
अठावले ने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार लोगों को न्याय देने में सफल नहीं रही है। उनके मुताबिक किसान, गरीब, युवा, महिलाएं, दलित, सिख और हिंदू समाज के लोग सरकार से नाराज हैं।
AAP सरकार पर साधा निशाना
रामदास अठावले ने आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए दावा किया कि पंजाब की जनता उससे नाराज है और आगामी चुनाव में AAP को सत्ता से बाहर होना तय है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि NDA को सत्ता तक पहुंचाने के लिए रणनीति पर गंभीरता से विचार करना होगा।

प्रकाश सिंह बादल के दौर का दिया उदाहरण
अठावले ने BJP और SAD के पुराने गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और BJP लंबे समय तक साथ रहे थे। उनका दावा है कि दोनों दलों का गठबंधन लंबे समय तक सत्ता में भी रहा और यह राजनीतिक रूप से सफल रहा।
उनके मुताबिक पुराने गठबंधन के अनुभव को देखते हुए दोनों दलों को फिर से एक साथ आने पर विचार करना चाहिए।
कांग्रेस को रोकने की रणनीति
रामदास अठावले ने पंजाब में राजनीतिक मुकाबले को AAP और कांग्रेस के बीच भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को कमजोर करना है तो BJP, SAD और उनकी पार्टी RPI को मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए।
अठावले की इस सलाह से साफ है कि NDA के भीतर पंजाब चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति पर मंथन शुरू हो चुका है। हालांकि, सीट बंटवारे का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
गठबंधन हुआ तो बदलेगा चुनावी समीकरण?
पंजाब की राजनीति में BJP और SAD का पुराना रिश्ता रहा है। ऐसे में अगर दोनों दल दोबारा साथ आते हैं तो राज्य के चुनावी समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है, लेकिन अठावले के बयान ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
आने वाले समय में सीटों के बंटवारे और दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के फैसले से तय होगा कि BJP और SAD वास्तव में एक मंच पर आते हैं या नहीं।

