मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा थाना क्षेत्र में मकान निर्माण के लिए हो रही खुदाई अचानक चर्चा का विषय बन गई। बरखेड़ी गांव में 26 अगस्त को नींव खोदते समय जमीन के अंदर से बड़ी संख्या में पुराने चांदी के सिक्के निकलने लगे। दावा है कि सिक्कों की संख्या 700 से ज्यादा थी।
मकान मालिक और मजदूरों ने बांटे सिक्के
जानकारी के मुताबिक, सिक्के मिलने के बाद मकान मालिक, मजदूर और अन्य लोगों ने उन्हें आपस में बांट लिया। आरोप है कि मामले को दबाने की कोशिश भी की गई। बाद में सिक्कों की संख्या और बंटवारे को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
ग्राम चौकीदार से सूचना मिलने के बाद भानपुरा पुलिस ने जांच शुरू की।
पुलिस ने कई लोगों को बनाया आरोपी
जांच के आधार पर पुलिस ने मकान मालिक प्रेमसिंह पिता देवीसिंह भाटी, मजदूर जीतमल बैरागी और दो नाबालिगों को मामले में आरोपी बनाया है। पुलिस ने अब तक उनके कब्जे से 144 चांदी के सिक्के और 2 लाख 38 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।

हालांकि, खुदाई के दौरान वास्तव में कुल कितने सिक्के निकले थे, यह अभी जांच का विषय है।
1904 के आसपास के सिक्के होने की जानकारी
पुलिस के मुताबिक, बरामद सिक्कों पर अंग्रेजी शासनकाल से जुड़े निशान दिखाई देते हैं। कुछ सिक्के करीब 1904 के आसपास के बताए जा रहे हैं। अगर इनकी उम्र और ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि होती है, तो मामला सिर्फ चांदी की कीमत तक सीमित नहीं रहेगा।
पुराने सिक्कों की वास्तविक कीमत उनकी धातु के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व, स्थिति और दुर्लभता पर भी निर्भर करती है।
एक सिक्के की कीमत करीब 4 हजार रुपये तक
भानपुरा पुलिस के अनुसार, तत्कालीन समय में सिक्कों में इस्तेमाल चांदी की शुद्धता के आधार पर एक सिक्के की कीमत करीब 4 हजार रुपये तक हो सकती है। इस अनुमान से बरामद सिक्कों के अलावा कथित तौर पर मिले बाकी सिक्कों की कीमत काफी बड़ी हो सकती है।
हालांकि, यह केवल प्रारंभिक अनुमान है। वास्तविक कीमत विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कहां गया बाकी खजाना?
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि खुदाई में कुल कितने सिक्के मिले थे और बाकी सिक्के आखिर कहां गए। पुलिस उन लोगों की भी जानकारी जुटा रही है, जिनके पास कथित तौर पर सिक्के पहुंचे।
साथ ही बरामद सिक्कों की ऐतिहासिक पहचान और वास्तविक कीमत का आकलन भी कराया जाएगा।
जमीन के नीचे छिपा इतिहास, जांच में खुलेंगे राज
बरखेड़ी की इस घटना ने गांव में उत्सुकता जरूर पैदा कर दी है, लेकिन कानूनी तौर पर सिक्कों की बरामदगी और उनके बंटवारे से जुड़े कई सवाल अब पुलिस जांच का हिस्सा हैं। जमीन से निकली यह पुरानी संपत्ति आखिर किसकी थी और इतने वर्षों तक मिट्टी के नीचे कैसे दबी रही, इसका जवाब भी जांच के साथ सामने आ सकता है। फिलहाल 144 सिक्कों और नकदी की बरामदगी के बाद पुलिस बाकी कथित खजाने की तलाश में जुटी है।

