जबलपुर के गोकलपुर बाल सुधार गृह से सामने आई शिकायत ने सुधार गृहों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक किशोर ने आरोप लगाया कि वहां बच्चों से कथित तौर पर हर सप्ताह पैसे वसूले जाते थे और विरोध करने पर मारपीट की जाती थी।
किशोर ने सुनाई कथित डरावनी कहानी
जमानत पर बाहर आए 17 वर्षीय किशोर ने अपने पिता को कथित तौर पर बताया कि बाल सुधार गृह में कुछ नाबालिगों का समूह दूसरे बच्चों को धमकाकर हर सप्ताह एक हजार रुपये वसूलता था। किशोर के मुताबिक, पैसे नहीं देने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसके हाथों पर ब्लेड से चोट पहुंचाई गई।
इस शिकायत के सामने आने के बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से संपर्क किया।
तलाशी में मोबाइल और गांजा बरामद
शिकायत के बाद अधिकारियों ने गोकलपुर बाल सुधार गृह में सघन तलाशी ली। इस दौरान मोबाइल फोन के साथ गांजा और गुटखा जैसे प्रतिबंधित सामान मिलने की बात सामने आई है।
इन चीजों की बरामदगी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि निगरानी वाले परिसर में प्रतिबंधित सामान और मोबाइल फोन आखिर कैसे पहुंचे।

हाथों पर चोट की पुष्टि, वजह पर अलग दावा
बाल सुधार गृह प्रबंधन ने किशोर के हाथों पर जख्म होने की बात स्वीकार की है। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि चोट ब्लेड से हमला करने के कारण नहीं, बल्कि पढ़ाई के लिए उपलब्ध कराए गए शार्पनर की ब्लेड से लगी हो सकती है।
इस दावे और किशोर के आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
‘हफ्ता’ वसूली के आरोप ने बढ़ाई चिंता
अगर किशोर के लगाए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहेगा। बाल सुधार गृह के भीतर कथित तौर पर बच्चों से नियमित रूप से पैसे वसूलने का आरोप सुरक्षा और निगरानी की गंभीर खामियों की ओर इशारा करेगा।
ऐसे संस्थानों में रहने वाले बच्चे पहले से ही संवेदनशील स्थिति में होते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस जांच के लिए न्यायालय के निर्देश का इंतजार
परिजनों ने मामले की शिकायत रांझी थाने में की है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा के मुताबिक, परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस बाल न्यायालय के निर्देशों का इंतजार कर रही है।
जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिबंधित सामान सुधार गृह तक कैसे पहुंचा और क्या कथित वसूली में अन्य नाबालिग या कोई बाहरी व्यक्ति भी शामिल था।
सुधार गृह की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
बाल सुधार गृह का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण देकर उन्हें बेहतर भविष्य की ओर ले जाना है। ऐसे में यदि परिसर के भीतर मारपीट, नशे और कथित वसूली जैसी गतिविधियां सामने आती हैं, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
अब निगाह पुलिस और बाल न्यायालय की कार्रवाई पर है। जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार कौन है।

