back to top
Tuesday, August 18, 2026
Homeराजनीतिशिरडी साईं बाबा पर कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर दिल्ली HC सख्त,...

शिरडी साईं बाबा पर कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर दिल्ली HC सख्त, GAC को जल्द फैसला लेने का निर्देश

शिरडी साईं बाबा को लेकर सोशल मीडिया और YouTube पर कथित आपत्तिजनक सामग्री के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को तत्काल विचार योग्य बताया और केंद्र की ग्रिवांस अपीलेट कमेटी से लंबित शिकायत पर जल्द फैसला लेने की बात कही।

ट्रस्ट ने लगाए गंभीर आरोप

यह याचिका साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी की ओर से दाखिल की गई है। ट्रस्ट का आरोप है कि YouTube और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साईं बाबा के बारे में झूठे, अपमानजनक और धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले दावे किए जा रहे हैं।

ट्रस्ट के मुताबिक, मार्च से कई YouTube चैनलों पर ऐसी सामग्री सामने आने लगी। याचिका में दावा किया गया है कि कुछ वीडियो में साईं बाबा के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। ट्रस्ट का कहना है कि ऐसी सामग्री धार्मिक वैमनस्य और सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे सकती है।

YouTube से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं?

ट्रस्ट ने 15, 17 और 19 जुलाई को YouTube के शिकायत निवारण तंत्र के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। ट्रस्ट का कहना है कि प्लेटफॉर्म ने शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अपलोडर से संपर्क करने या हाईकोर्ट का आदेश लेने की बात कही।

शिरडी साईं बाबा पर कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर दिल्ली HC सख्त, GAC को जल्द फैसला लेने का निर्देश

ट्रस्ट के मुताबिक, शिकायत में केवल सामान्य जानकारी नहीं दी गई थी, बल्कि संबंधित वीडियो के URL, टाइम स्टैंप और कथित आपत्तिजनक हिस्सों का भी विवरण दिया गया था।

सरकार और GAC तक पहुंचा मामला

YouTube से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद ट्रस्ट ने 26 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सामने प्रतिनिधित्व दिया। इसके बाद 29 जुलाई को ग्रिवांस अपीलेट कमेटी यानी GAC में अपील दाखिल की गई।

अब मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है और अदालत के रुख से साफ है कि वह शिकायत के निपटारे में अनावश्यक देरी नहीं चाहती।

GAC को 7 या 10 दिन का समय?

सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से अदालत को बताया गया कि YouTube ने प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय न्यायालय से आदेश लेने की बात कही। इस पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि वह GAC को मामले पर निर्णय लेने के लिए निर्देश देने पर विचार कर रही हैं।

अदालत ने संकेत दिया कि शिकायत और लंबित अपील पर GAC को 7 या 10 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया जा सकता है। हालांकि, अंतिम आदेश में क्या निर्देश जारी होते हैं, यह अदालत के अगले आदेश से स्पष्ट होगा।

वीडियो हटाने और दोबारा अपलोड रोकने की मांग

ट्रस्ट ने हाईकोर्ट से मांग की है कि चिन्हित वीडियो और ऑनलाइन सामग्री को हटाने, उनकी पहुंच रोकने या उन्हें डीलिस्ट करने के निर्देश दिए जाएं। इसके साथ ही समान सामग्री को दोबारा अपलोड या प्रकाशित किए जाने पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

फिलहाल अदालत ने कथित सामग्री को लेकर अंतिम फैसला नहीं दिया है। लेकिन GAC को जल्द निर्णय लेने के संकेत के बाद अब निगाह इस बात पर है कि केंद्र की अपीलेट कमेटी ट्रस्ट की शिकायत पर क्या फैसला करती है। यह मामला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धार्मिक सामग्री, शिकायत निवारण व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर भी महत्वपूर्ण बहस खड़ी कर सकता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments