झारखंड में JPSC-JSSC नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद मंगलवार को बंद के बीच विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमलावर हैं।
लाठीचार्ज के बाद बढ़ा विवाद
सोमवार को विधानसभा घेराव करने पहुंचे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान आंसू गैस के गोले दागे गए और वॉटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों के समर्थन में मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान किया गया, जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई है।
JDU ने हेमंत सरकार पर उठाए सवाल
नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने भी छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक तरफ छात्रों से संवाद की बात करते हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज होता है। उनके मुताबिक दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं।
श्याम रजक ने कहा कि आंदोलन को राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान तलाशना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष को मिलकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

JDU प्रवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप
JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र लगातार नौकरियों में पैसे और पैरवी से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक युवाओं में भविष्य को लेकर असुरक्षा बढ़ी है और इसी वजह से रांची की सड़कों पर इतना बड़ा टकराव देखने को मिला।
हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और इनके संबंध में सरकार की ओर से स्वतंत्र रूप से पुष्टि जरूरी होगी।
बीजेपी ने मांगी CBI जांच
बीजेपी ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराने की मांग दोहराई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री दिलीप जायसवाल ने सवाल उठाया कि यदि सरकार की ओर से कोई गलती नहीं हुई है तो जांच कराने में परेशानी क्यों है।
उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है और छात्रों के बीच उठ रहे सवालों का जवाब भी मिल सकता है।
अब बातचीत से समाधान की मांग
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बाद मामला अब सिर्फ परीक्षा और नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा। लाठीचार्ज, कथित अनियमितताओं और CBI जांच की मांग ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा बहाल करना और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालना है।

