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Tuesday, August 18, 2026
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‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, फर्जी वकीलों की जांच की मांग भी उठी

सुप्रीम कोर्ट में जजों और वकीलों की मौखिक टिप्पणियों को कथित तौर पर संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता राजा चौधरी ने 15 मई 2026 की एक सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की टिप्पणी में ‘कॉकरोच’ शब्द के इस्तेमाल का हवाला दिया है।

टिप्पणी से अभियान शुरू करने का दावा

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत की टिप्पणी को उसके मूल संदर्भ से अलग करके सोशल मीडिया पर प्रचारित किया गया और इसी आधार पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP नाम का अभियान शुरू हुआ। याचिकाकर्ता का दावा है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया। उन्होंने ऐसी गतिविधियों की जांच की मांग की है।

फर्जी वकीलों का मुद्दा भी उठा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने फर्जी वकीलों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि नकली डिग्री या गलत दस्तावेजों के आधार पर कानूनी पेशे में प्रवेश करने वालों की पहचान जरूरी है। याचिका में इस तरह की जांच पूरे देश में कराने की मांग की गई है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, फर्जी वकीलों की जांच की मांग भी उठी

युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने का आरोप

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को सोशल मीडिया पर इस तरह पेश किया गया, जिससे यह धारणा बनी कि देश के युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहा गया है। इसके बाद मीम और वायरल कंटेंट के जरिए अभियान चलाया गया। याचिका में इसे अदालत की टिप्पणी के कथित राजनीतिक और व्यावसायिक इस्तेमाल से जोड़ते हुए जांच की मांग की गई है।

केंद्र, CBI और बार काउंसिल को नोटिस

मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और CBI को नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। नोटिस जारी होना याचिका में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं है, बल्कि संबंधित पक्षों से जवाब मांगे जाने की न्यायिक प्रक्रिया है।

10 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। इसी दौरान अदालत की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर इस्तेमाल किए जाने से संबंधित एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई होनी है। दोनों मामलों को साथ सुना जाएगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि अदालत मौखिक टिप्पणियों के डिजिटल इस्तेमाल और उनके संदर्भ से अलग प्रचारित किए जाने को लेकर क्या दिशा-निर्देश देती है।

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