NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत न तो पुलिस की कथित ज्यादती को स्वीकार करेगी और न ही प्रदर्शन की आड़ में हिंसा या गंभीर अपराध में शामिल लोगों को राहत देगी। अदालत ने सरकार से दर्ज एफआईआर का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है।
सरकार ने छात्रों के खिलाफ नरमी का संकेत दिया
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार का उद्देश्य छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं या जो प्रदर्शन के दौरान आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए गए, उन्हें किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी FIR की पूरी जानकारी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत यह जानना चाहती है कि कुल कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं, उनमें कितने लोग ऐसे हैं जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास है और किन मामलों को बंद या वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार से दिल्ली सहित अन्य राज्यों में दर्ज सभी संबंधित एफआईआर का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने को कहा गया है।

छात्रों के भविष्य पर जताई चिंता
वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत में कहा कि यह मामला हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने अदालत से स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग की कि किन मामलों में एफआईआर रद्द या वापस ली जा सकती है। पटना में हजारों अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठाया गया।
पुलिस कार्रवाई और SIT जांच पर चर्चा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल प्रयोग और बिना वर्दी वाले लोगों की मौजूदगी पर सवाल उठाए। इस पर अदालत ने संकेत दिया कि पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) या किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है।
गंभीर अपराधियों को नहीं मिलेगी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “आपराधिक इतिहास” से आशय केवल ऐसे लोगों से है जिनके खिलाफ हत्या जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। अदालत ने कहा कि सरकार यदि सामान्य छात्रों के मामलों में राहत देने पर विचार करती है तो भी गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। मामले की अगली सुनवाई में एफआईआर, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की पहचान से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से विचार किया जाएगा। इस बीच बिहार सरकार ने भी 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया है।

