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Wednesday, September 16, 2026
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संसद मार्च पर सियासत तेज, चिराग की पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित संसद मार्च के दौरान सड़क पर प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी दोनों तेज हो गईं। एक ओर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव देखने को मिला, तो दूसरी ओर सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया।

संसद मार्च के बीच बढ़ा तनाव

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर देशभर से छात्र और युवा दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की, जिसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। इस घटनाक्रम ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

चिराग पासवान की पार्टी का पलटवार

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति विपक्षी नेताओं से इस्तीफे या माफी की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ जाए, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी। अरुण भारती की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।

संसद मार्च पर सियासत तेज, चिराग की पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही मांगों को दबाया जा रहा है। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और सरकार को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर बहस

कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग दोहराई। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है। वहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर पहले भी परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जाती रही है।

जंतर-मंतर का प्रदर्शन अब केवल सड़क तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर संसद और राजनीतिक बयानबाजी में भी साफ दिखाई दे रहा है। एक ओर छात्र अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, वहीं विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय और रणनीति सामने रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और राजनीति दोनों में बहस जारी रहने की संभावना है।

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