पंजाब कांग्रेस में हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ असंतोष अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। कांग्रेस हाईकमान की ओर से जारी नई संगठनात्मक सूची में बदलाव से इनकार किए जाने के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल लगातार नेताओं के साथ बैठकें कर संगठन को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के अगले कदम पर सभी की नजर बनी हुई है।
हाईकमान के रुख के बाद बढ़ी हलचल
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने संगठनात्मक नियुक्तियों में किसी तरह के फेरबदल के संकेत नहीं दिए हैं। इसके बाद चन्नी समर्थक नेताओं के बीच हलचल बढ़ गई है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से किसी बड़े मतभेद की पुष्टि नहीं की गई है।
भूपेश बघेल लगातार कर रहे बैठकें
पंजाब कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल लगातार तीसरे दिन चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में नेताओं के साथ बैठकें करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना, विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देना और कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता का संदेश देना बताया जा रहा है।
मंगलवार देर शाम भी उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग दौर की बातचीत की थी। बुधवार को भी बैठकों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

चन्नी ने अब तक नहीं की मुलाकात
राजनीतिक चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अब तक प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात नहीं की है। हालांकि, उनके समर्थक माने जाने वाले राजकुमार वेरका और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा दोनों पक्षों के बीच संवाद और सुलह की संभावनाएं तलाशने में जुटे बताए जा रहे हैं। इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
चुनावी रणनीति पर भी होगी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, सांसद एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा भी आज भूपेश बघेल से मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर भी कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें चुनावी रणनीति, मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों और संगठनात्मक सक्रियता पर चर्चा होने की संभावना है।
संगठन को चुनावी मोड में लाने की कोशिश
कांग्रेस नेतृत्व का प्रयास है कि हालिया नियुक्तियों को लेकर पैदा हुई नाराजगी को जल्द समाप्त किया जाए और पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह सक्रिय किया जाए। वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार हो रही बैठकों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

