हरियाणा सरकार ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और डिजिटल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत टोकन सिस्टम, आधार आधारित e-KYC, डिजिटल हस्ताक्षर और QR कोड जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं। सरकार का दावा है कि इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया में देरी, भीड़ और बिचौलियों की भूमिका पर अंकुश लगेगा।
तहसील स्तर पर लागू हुई नई टोकन व्यवस्था
Revenue and Disaster Management Department, Haryana ने प्रदेश की सभी तहसीलों और उप-मंडल स्तर के पंजीकरण कार्यालयों में टोकन आधारित व्यवस्था लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक पंजीकरण कार्यालय में प्रतिदिन अधिकतम 20 टोकन ही जारी किए जाएंगे।
हालांकि, उप-तहसीलों में पहले की तरह रजिस्ट्री की प्रक्रिया जारी रहेगी।

रैंडम टोकन से खत्म होगा पक्षपात
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों को नई व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के अनुसार, टोकन रैंडम आधार पर जारी किए जाएंगे ताकि वीआईपी संस्कृति और पक्षपात की संभावना समाप्त हो तथा सभी आवेदकों को समान अवसर मिल सके।
पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 लागू
नई व्यवस्था के तहत Paperless Registration 2.0 लागू किया गया है। इसके अंतर्गत:
- आधार आधारित e-KYC अनिवार्य होगी।
- डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमैट्रिक सत्यापन जरूरी होगा।
- प्रत्येक रजिस्ट्री दस्तावेज पर QR कोड होगा, जिससे उसकी प्रामाणिकता की डिजिटल पुष्टि की जा सकेगी।
विदेश में बैठे लोग भी करा सकेंगे रजिस्ट्री
सरकार ने प्रवासी हरियाणावासियों के लिए भी बड़ी सुविधा देने की घोषणा की है। अब विदेश में रहने वाले लोग वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल माध्यमों की सहायता से ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे उन्हें केवल रजिस्ट्री के लिए भारत आने की आवश्यकता नहीं होगी।
लंबित इंतकाल एक महीने में निपटाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी लंबित इंतकाल (Mutation) मामलों को अगले एक महीने के भीतर निपटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जानबूझकर रजिस्ट्री प्रक्रिया में अनावश्यक आपत्ति लगाता है या लापरवाही करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ कम होगी, एजेंटों द्वारा कथित शोषण पर रोक लगेगी और संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनेगी।

