उत्तर प्रदेश के एक कार्यक्रम में ज्योति पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गो-संरक्षण के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने गाय को “राजमाता” घोषित करने की मांग दोहराई और आगामी चुनावों को लेकर भी लोगों से अपील की।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
Avimukteshwaranand Saraswati ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार को गो-संरक्षण के लिए और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार गाय को पशुओं की सामान्य श्रेणी से अलग कर “राजमाता” का दर्जा देती है, तो वे उसे हिंदू हितों के प्रति प्रतिबद्ध सरकार मानेंगे। यह उनका राजनीतिक और धार्मिक दृष्टिकोण है।
गो-संरक्षण यात्रा का किया उल्लेख
शंकराचार्य ने बताया कि वे गो-संरक्षण के समर्थन में प्रदेशभर में यात्रा कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह यात्रा 3 मई को गोरखपुर से शुरू हुई थी और कई विधानसभा क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य गो-संरक्षण के प्रति जनजागरण करना है।
चुनाव को लेकर की अपील
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों से आगामी चुनाव में मतदान करते समय गो-संरक्षण के मुद्दे को ध्यान में रखने की अपील की। उन्होंने एक नारा भी दिया और अपने समर्थकों से उसी आधार पर मतदान करने का आग्रह किया। यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक आह्वान है।

सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
अपने भाषण में शंकराचार्य ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके अनुसार गो-संरक्षण के क्षेत्र में अपेक्षित कार्य नहीं हुए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार द्वारा गाय से संबंधित लिए गए एक निर्णय का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से भी इसी प्रकार के कदम उठाने की मांग की।
कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने गोवंश से जुड़े कुछ आंकड़े और दावे भी प्रस्तुत किए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से नहीं हुई है। इसलिए इन्हें उनके सार्वजनिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

